देहरादून ,
दून घाटी की बरसाती नदियों — रिस्पना, बिंदाल, तमसा, सोंग और अन्य सहायक नदियाँ — इन दिनों अपने रौद्र रूप में हैं। भारी बारिश से उफनती धाराओं ने न सिर्फ तटवर्ती बस्तियों को डरा दिया, बल्कि मानो खुद ही उन पर “अतिक्रमण हटाओ नोटिस” थमा दिया हो। नदियों के बहाव ने कई घरों की नींव हिला दी है और तीन-चार मकान बहा भी दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नदियाँ अपने प्राकृतिक मार्ग पर लौटने में समय जरूर लगाती हैं, लेकिन अंततः रास्ता खाली कर ही लेती हैं। इस मानसून में नदी जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है, जिससे अवैध बस्तियों पर आपदा का साया मंडराने लगा है।
नैनीताल हाई कोर्ट और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) कई बार सरकार को दून घाटी में अवैध कब्जे हटाने के आदेश दे चुके हैं। बावजूद इसके राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और वोट बैंक की राजनीति के चलते कार्रवाई अधर में लटकी रही।
मुख्य हालात:
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रिस्पना नदी पुल को छूती बहती दिखी, दर्जनों झोपड़ियां व मवेशी बह गए।
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बिंदाल नदी ने कांवली रोड पर पुल के ऊपर से बहाव दिखाया।
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तमसा नदी का पानी टपकेश्वर मंदिर तक पहुँच गया।
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सहस्त्रधारा, मालदेवता और आईटी पार्क इलाका जलमग्न रहा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। हालांकि, फिलहाल यह रोक केवल नए निर्माण तक सीमित है। नदियों के किनारे पहले से हो रहे अतिक्रमण को हटाने के लिए सरकार को ठोस राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखानी होगी।
स्पष्ट संदेश: इस मानसून ने साफ कर दिया है कि अगर नदियों के मार्ग में अतिक्रमण किया जाएगा, तो उनका रौद्र प्रवाह सब कुछ बहा ले जाएगा।