कांग्रेस ने उत्तराखंड में “मेरा वोट – मेरा अधिकार” अभियान के तहत व्यापक जनसंपर्क और जनजागरण शुरू किया है।

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय देहरादून में आयोजित प्रेसवार्ता में कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) सदस्य गुरदीप सप्पल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और भाजपा की मिलीभगत से देशभर में मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और अपात्र नाम जोड़े जा रहे हैं। इसे उन्होंने “लोकतंत्र की सीधी हत्या” करार दिया।

कांग्रेस के आरोप और अभियान की मुख्य बातें:

  • कांग्रेस की ओर से लगभग 2,500 आरटीआई आवेदन दाखिल किए गए, लेकिन केवल 136 जवाब मिले, जिनमें अधिकांश टालमटोल वाले थे।

  • हरिद्वार निर्वाचन कार्यालय ने पहले आरटीआई स्वीकारने से इनकार किया और डाकघरों में पोस्टल ऑर्डर की कमी जैसी बाधाएँ सामने आईं।

  • कांग्रेस का दावा है कि यदि ये अड़चनें न होतीं, तो आवेदन 10,000 से अधिक हो सकते थे।

  • देहरादून नगर निगम चुनाव (अगस्त 2024) में मतदाता सूची से करीब 96,000 नाम हटाए गए, जिनमें से चुनाव से तीन दिन पहले फिर से 32,000 नाम काटे गए।

  • कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची में फेरबदल की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है।

कांग्रेस ने उठाए ये मुद्दे:

  1. पंचायत चुनावों की मतदाता सूचियों में सभी पात्र मतदाताओं का नाम शामिल हो।

  2. मृतक/स्थानांतरित व्यक्तियों के नाम हटाए जाएँ।

  3. शहरी सूचियों से नाम हटाकर गलत तरीके से ग्रामीण सूचियों में न जोड़े जाएँ।

  4. सामूहिक स्थानांतरण (Mass Migration) पर विशेष निगरानी रखी जाए।

ऐतिहासिक संदर्भ:

कांग्रेस नेताओं ने याद दिलाया कि भारत ने 1950 में ही सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार लागू कर दिया था, जबकि कई विकसित देशों ने दशकों बाद अपने नागरिकों को यह अधिकार दिया।

  • ब्रिटेन: 1928 में महिलाओं को अधिकार

  • अमेरिका: 1965 में अफ्रीकी-अमेरिकी नागरिकों को भेदभाव रहित अधिकार

  • फ्रांस: 1944 में महिलाओं को अधिकार

  • स्विट्ज़रलैंड: 1971 में महिलाओं को अधिकार

कांग्रेस का संकल्प:

  • “मेरा वोट – मेरा अधिकार” अभियान को 2027 के विधानसभा चुनावों तक जारी रखा जाएगा।

  • प्रदेश में “वोट चोरी” रोककर कांग्रेस पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने का लक्ष्य रखेगी।

  • वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने नागरिकों से अपील की कि यदि मतदाता सूची में अनियमितताएँ दिखें तो कांग्रेस से संपर्क करें और इस संघर्ष में शामिल हों।

अंत में कांग्रेस नेताओं ने कहा –
“लोकतंत्र में भागीदारी केवल अधिकार नहीं, कर्तव्य भी है।”

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