देहरादून ,
यदुनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन ऑफ पॉलिसी एंड एडमिनिस्ट्रेशन (वाईएसआरएफपीए) एवं प्रयास आईएएस स्टडी सर्किल के तत्वावधान में 11वें नेशनल एनुअल कॉन्फ्रेंस ऑन गुड गवर्नेंस का आयोजन देहरादून में किया गया। सम्मेलन में देशभर से कुलपति, प्रोफेसर, शोधकर्ता, वैज्ञानिक, विधिवेत्ता और सिविल सेवा परीक्षा के अभ्यर्थी शामिल हुए। इस अवसर पर संस्था के 11वें स्थापना दिवस का भी उत्सव मनाया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ और संबोधन
कार्यक्रम का संचालन संस्था के निदेशक डॉ. सुशील कुमार सिंह और कार्यक्रम निदेशक व संयोजक गीता सिंह के नेतृत्व में हुआ। सम्मेलन की आधारशिला संस्था के संरक्षक एवं मुख्य सलाहकार, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल के पूर्व कुलपति प्रो. सी. पी. बर्थवाल ने अपने विशेष व्याख्यान से रखी।
एलएनसीटी यूनिवर्सिटी, भोपाल के कुलपति डॉ. नरेंद्र थापक ने सम्मेलन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुड गवर्नेंस वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
बुद्धिजीवियों की सहभागिता
इस अवसर पर प्रो. अजीत कुमार कर्नाटक, कुलपति, महाराणा प्रताप यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, उदयपुर, प्रो. संजय कुमार तिवारी, कुलपति, हेमचंद यादव स्टेट यूनिवर्सिटी, दुर्ग समेत देश के कई प्रख्यात शिक्षाविदों और विचारकों ने अपने विचार व्यक्त किए।
सम्मेलन के दौरान इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज, त्रिपुरा यूनिवर्सिटी अगरतला समेत सात राज्यों से आए आठ कुलपतियों को वाईएस रिसर्च एक्सीलेंस अवार्ड 2024 से सम्मानित किया गया।
सुशासन पर जोर
मुख्य वक्ता प्रो. बर्थवाल ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान सुशासन की बुनियाद हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को तुलनात्मक रूप से और बेहतर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
संस्था के निदेशक डॉ. सुशील कुमार सिंह ने शासन और सुशासन के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत बिना समावेशी विकास और लोक सशक्तिकरण के आत्मनिर्भर नहीं बन सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुशासन के लिए अच्छे मन और संवेदनशील दृष्टिकोण का होना अनिवार्य है।