मदरसों में वजीफे का गड़बड़झाला, आईजी निलेश भरणे करेंगे एसआईटी जांच

सीएम धामी के आदेश पर गठित SIT, सरस्वती शिशु मंदिर के नाम से भी उठे फर्जीवाड़े के सवाल

देहरादून ,

उत्तराखंड में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित कर दी है। इसकी कमान आईजी लॉ एंड ऑर्डर डॉ. निलेश भरणे को सौंपी गई है।

मामला क्या है?

  • सरस्वती शिशु मंदिर हाई स्कूल किच्छा को राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर मदरसा और अल्पसंख्यक विद्यालय दिखाया गया।

  • पोर्टल पर यहां 154 मुस्लिम छात्रों के अध्ययन का दावा किया गया, जबकि यह विद्यालय अल्पसंख्यक श्रेणी में आता ही नहीं।

  • संचालक के नाम पर भी संदेह—मोहम्मद शारिक और अतीक का नाम दर्ज।

संदिग्ध संस्थान और आंकड़े

  • उधमसिंह नगर में जांचे गए 796 आवेदनों में से 456 छात्रों की जानकारी संदिग्ध।

  • नेशनल अकादमी काशीपुर – 125 मुस्लिम छात्र (संचालक: गुलशफा अंसारी)।

  • मदरसा अल जामिया उल मदरिया – 27 छात्र (संचालक: मोहम्मद फैजान)।

  • मदरसा अल्बिया रफीक उल उलूम, बाजपुर – 39 छात्र (संचालक: जावेद अहमद)।

  • मदरसा जामिया आलिया, गदरपुर – 24 छात्र (संचालक: जावेद अहमद)।

  • मदरसा जामिया रजा उल उलूम, बाजपुर – 85 छात्र (संचालक: इरशाद अली)।

राजनीतिक हलचल

  • हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र रावत ने यह मुद्दा लोकसभा में उठाया।

  • केंद्र के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने माना कि अन्य राज्यों में भी ऐसी शिकायतें आई हैं और जांच चल रही है।

सरकार की प्रतिक्रिया

विशेष सचिव (अल्पसंख्यक कल्याण) डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और केंद्र सरकार से भी संवाद हो रहा है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा:

“राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर दर्ज आंकड़े संदिग्ध हैं। सरस्वती शिशु मंदिर के नाम से छात्रवृत्ति का मामला सामने आना गंभीर है। SIT को जिम्मेदारी दी गई है और सरकार चाहती है कि जांच जल्द पूरी हो।”

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