देहरादून ,
श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज एवं श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में गुरुवार को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) और कार्डियक लाइफ सपोर्ट पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला का उद्देश्य डॉक्टरों, पीजी छात्रों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को आपातकालीन स्थितियों में जीवन रक्षक तकनीकों से लैस करना था।
🕯️ कार्यशाला का उद्घाटन
कार्यशाला का शुभारंभ मेडिकल डायरेक्टर डॉ. मनोज गुप्ता, प्राचार्य डॉ. अशोक नायक, डॉ. पुनीत ओहरी एवं अन्य वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।
🩺 प्रशिक्षण के प्रमुख बिंदु
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डॉ. अंजलि चौधरी ने बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर आपात स्थिति में समय पर की गई प्रतिक्रिया किसी व्यक्ति की जान बचा सकती है।
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डॉ. मनोज गुप्ता ने कहा कि BLS और एडवांस कार्डियक लाइफ सपोर्ट (ACLS) की जानकारी हर स्वास्थ्यकर्मी के लिए अनिवार्य है।
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डॉ. अशोक नायक ने PG डॉक्टरों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसी कार्यशालाएं व्यावहारिक दक्षता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
🧍♂️ प्रैक्टिकल डेमो और तकनीकी प्रशिक्षण
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डॉ. निशिथ गोविल (विभागाध्यक्ष, एनेस्थीसिया) ने मानव पुतले (मैनिक्विन) पर CPR की प्रक्रिया का प्रायोगिक प्रदर्शन दिया। उन्होंने बताया:
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कैसे चेस्ट कंप्रेशन और रेस्क्यू ब्रीदिंग सही तरीके से की जाती है
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ऑटोमैटिक एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED) का उपयोग
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बच्चों और गर्भवती महिलाओं को CPR देते समय बरती जाने वाली सावधानियाँ
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डॉ. आशुतोष सिंह (विभागाध्यक्ष, आपातकालीन चिकित्सा विभाग) ने कहा कि अस्पताल में अचानक कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में ACLS तकनीक के माध्यम से रोगी की जान बचाना संभव है। उन्होंने सभी स्वास्थ्यकर्मियों को इसमें दक्ष होने की आवश्यकता बताई।
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डॉ. हरिओम खंडेलवाल ने ईसीजी पढ़ने की तकनीक सिखाई और हृदय की इलेक्ट्रिकल गतिविधियों के विश्लेषण से संबंधित बीमारियों का पूर्वानुमान समझाया।
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डॉ. राहुल चौहान ने टैकीकार्डिया (तीव्र हृदय गति) की स्थितियों, कारणों एवं उपचार विधियों पर विस्तार से चर्चा की।
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डॉ. उमे मरियम ने हार्ट अटैक के बाद की पुनर्वास प्रक्रिया पर प्रकाश डाला, जिसमें लंबी अवधि की देखभाल, जीवनशैली में बदलाव और मेडिकल मैनेजमेंट की भूमिका अहम है।
📌 कार्यशाला का महत्व
यह कार्यशाला आपात स्थितियों में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही। उपस्थित प्रतिभागियों ने इसे ज्ञानवर्धक और व्यवहारिक रूप से उपयोगी बताया।