अधिनियम में परिसीमन व जनगणना को लाद देश की महिलाओं के साथ केन्द्र सरकार ने किया मजाकः प्रियंका
देहरादून ,
अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका सिंह ने महिला आरक्षण अधिनियम को लेकर केन्द्र सरकार पर निशाना साधा। आज कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि जहां नारी की पूजा होती है वहां देवताओं का वास होता है, और देश भर एवं उत्तराखंड में नारी की स्थिति क्या है वह सभी जानते है। उन्होंने कहा कि उन्नाव, हाथरस, लखीमपुर खीरी, मणिपुर, उत्तराखंड की अंकिता भंडारी के साथ दुराचार व अत्याचार हुआ है संसद में इस मामले में भाजपा की महिला सांसदों ने एक शब्द भी नहीं बोला है वह पूरी तरह से मौन रहीं। उन्होंने कहा कि संसद का विशेष सत्र बुलाया गया जिसे एक इवेंट के रूप में बनाया गया। महिला आरक्षण विधेयक के रूप में पेश किया और देश की महिलाओं के साथ धोखा किया। परिसीमन व जनगणना को लाद दिया है यह केवल देश की महिलाओं के साथ केन्द्र सरकार ने मजाक किया। उन्होंने कहा कि 1989 प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में पंचायती राज संस्थानों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की शुरुआत की और जब कांग्रेस महिलाओं के लिए आरक्षण के लिए कांग्रेस संसद में बिल लाई तो बीजेपी के दिग्गज नेता लाल कृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेई, यशवंत सिंह और राम जेठमलानी ने उसके विरोध में वोट किया। उन्होंने कहा कि दिसंबर 1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव ने पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक को फिर से पेश किया। उन्होंने कहा कि दोनों विधेयक पारित हुए और कानून बन गए। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के कोटे के भीतर महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की गईं। उन्होंने कहा कि आज पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की दूरदृष्टि से भारत में 15 लाख महिलाओं का सशक्तिकरण हुआ है। इनमें लगभग 40 प्रतिशत निर्वाचित महिला प्रतिनिधि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक पेश किया जो कि राज्यसभा से पारित हुआ था। उन्होंने कहा कि विधेयक में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान था। उन्होंने कहा कि एससी और एसटी के लिए उप-कोटा था। उन्होंने कहा कि राज्यसभा से नौ मार्च 2010 को यह विधेयक पास हो गया था। उन्होंने कहा कि लेकिन सर्वसम्मति न होने के कारण यह लोकसभा में पास नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि 2016 में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार आठ मार्च 2016 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित करे। उन्होंने कहा कि हमें विश्वास है कि भारत की भावी महिला सांसद आज की भाजपा सांसदों की तरह चुप नहीं रहेंगी। वह बैखोफ होकर महिलाओं के खिलाफ बढ़ते हुए जघन्य अपराधों पर बोलेंगी, उनकी भर्त्सना कर सकेंगी और अपराधियों को सजा दिलाने के लिए निडर हो कर माँग करेंगी। इस अवसर पर अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे।