देहरादून,
प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। सरकारी अस्पतालों में शव वाहन (डेड बॉडी वैन) की भारी कमी देखी जा रही है। पूरे उत्तराखंड में स्वास्थ्य विभाग के पास महज 10 शव वाहन उपलब्ध हैं, जबकि छह जिलों में एक भी सरकारी शव वाहन नहीं है।
🚑 छह जिलों में शव वाहन शून्य
वर्तमान में देहरादून, हरिद्वार, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी, उत्तरकाशी और चमोली जिलों में ही शव वाहन उपलब्ध हैं।
जबकि अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, पौड़ी, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में एक भी शव वाहन नहीं है, जिससे परिजनों को शव ले जाने के लिए निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है।
🧾 वर्तमान स्थिति (जिला अनुसार शव वाहन की संख्या)
| जिला | शव वाहन की संख्या |
|---|---|
| देहरादून | 01 |
| हरिद्वार | 01 |
| पिथौरागढ़ | 01 |
| रुद्रप्रयाग | 02 |
| टिहरी | 01 |
| उत्तरकाशी | 02 |
| चमोली | 02 |
| 6 जिले (शून्य) | 0 |
⚠️ परिजनों को करना पड़ रहा निजी इंतज़ाम
सरकारी वाहन न होने की स्थिति में मरीजों की मौत के बाद परिजनों को शव ले जाने के लिए निजी एंबुलेंस या अन्य वाहन की व्यवस्था करनी पड़ती है, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ता है।
🛑 स्वास्थ्य सचिव ने दिए निर्देश
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि जिन जिलों में शव वाहन नहीं हैं, वहां के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को निर्देश दिए गए हैं कि:
“जिलाधिकारी के विवेकाधिकार से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर शीघ्र एक-एक शव वाहन की व्यवस्था की जाए।”
🔍 जमीनी हकीकत पर उठे सवाल
यह स्थिति साफ दर्शाती है कि राज्य के स्वास्थ्य ढांचे में बुनियादी संसाधनों की कमी बनी हुई है। एक ओर सरकार “जनसेवा” और “सुगम स्वास्थ्य व्यवस्था” के दावे कर रही है, दूसरी ओर ज़मीनी हालात भयावह हैं।
📢 मांग उठी – हर जिले में हो शव वाहन की अनिवार्य उपलब्धता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि हर जिला अस्पताल और उप-जिला अस्पताल में कम से कम एक शव वाहन अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाए, जिससे असहाय परिजनों को इज्ज़त के साथ अपने परिजन का अंतिम संस्कार करने में सहायता मिल सके।