उत्तराखंड जल जीवन मिशन में बड़ा घोटाला उजागर, मुख्य अभियंता निलंबित — कई इंजीनियरों पर लटक रही गाज

करोड़ों खर्च फिर भी ग्रामीणों को नहीं मिला पानी, विभाग में मचा हड़कंप

देहरादून, जुलाई 2025।
उत्तराखंड पेयजल निगम में जल जीवन मिशन के तहत चल रही योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताएं सामने आई हैं। हाल ही में प्रारंभिक जांच में गड़बड़ियों की पुष्टि होने पर मुख्य अभियंता (कुमाऊं) को निलंबित करते हुए विजिलेंस जांच शुरू कर दी गई है। अब कई अन्य इंजीनियर भी जांच के दायरे में आ चुके हैं, जिससे विभागीय हलकों में हड़कंप मच गया है।

सूत्रों के अनुसार, पेयजल निगम मुख्यालय में कई अधिकारी स्वयं को जांच की आंच से बचाने के लिए सक्रिय हो गए हैं, लेकिन केंद्र की इस महत्वाकांक्षी योजना में गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों को इस बात का भय तक नहीं रहा कि यह विभाग मुख्यमंत्री के प्रत्यक्ष अधीन है।


गड़बड़ियों की जांच शुरू — टेंडर, निर्माण, डिजाइनिंग सभी में भ्रष्टाचार

विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि जल जीवन मिशन के साथ-साथ अन्य लघु एवं दीर्घ योजनाओं में भी टेंडर आवंटन, साइट सेलेक्शन, डिजाइनिंग और निर्माण कार्यों में भारी स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। जांच में पाया गया कि कई जगहों पर बिना योग्यता के ठेकेदारों को काम सौंपा गया, घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और फर्जी बिलिंग के जरिए पेमेंट कर दिया गया।


करोड़ों खर्च फिर भी ग्रामीणों को नहीं मिला स्वच्छ पेयजल

जांच रिपोर्टों में चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया है कि कई ग्रामीण इलाकों में, जहां योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं, वहां आज भी लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पाया है। कई जगह पाइपलाइन बिछाने और टंकियों के निर्माण में नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं, जिससे योजना की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में

जांच में यह भी इशारा मिला है कि भ्रष्टाचार सिर्फ फील्ड इंजीनियरों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रबंधन स्तर पर बैठे वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें संलिप्त हो सकते हैं। ठेकेदारों के साथ साठगांठ कर परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया है। कई योजनाओं में भुगतान के बावजूद काम अधूरा या बेहद घटिया स्तर का है।


जल्द हो सकती है और कार्रवाई, गठित हुई जांच समिति

पेयजल निगम के प्रबंधन ने साफ संकेत दिए हैं कि जल्द ही कई अन्य इंजीनियरों पर भी कार्रवाई की जाएगी। उच्च स्तरीय विजिलेंस और विभागीय जांच शुरू की जा चुकी है। जिन योजनाओं में बिना निरीक्षण के भुगतान, फर्जी बिल, और घटिया निर्माण सामग्री जैसी अनियमितताएं सामने आई हैं, वहां पर उत्तरदायित्व तय किया जाएगा।


सवालों के घेरे में पारदर्शिता की नीति

जल जीवन मिशन जैसे राष्ट्रीय महत्व की योजना में इस तरह के घोटाले शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही की नीति पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हैं। अब यह देखना होगा कि जांच में कौन-कौन दोषी साबित होते हैं और सरकार किस स्तर तक जवाबदेही तय करती है।

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