अवैध नशा मुक्ति केंद्रों पर होगी सख्त कार्रवाई, सभी जिलों में गठित होंगी निरीक्षण टीमें
देहरादून,
उत्तराखंड को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने के लक्ष्य को लेकर सरकार की मुहिम अब और तेज हो गई है। राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की बैठक में स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के “नशा मुक्त उत्तराखंड” विजन को धरातल पर उतारने के लिए बहुस्तरीय कार्ययोजना पर अमल की रूपरेखा तय की गई।
🔍 प्रमुख निर्णय व निर्देश:
✅ जिला स्तरीय निरीक्षण टीमें होंगी गठित
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मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम, 2017 के तहत सभी जिलों में निरीक्षण टीमें अविलंब गठित की जाएंगी।
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ये टीमें प्रत्येक नशा मुक्ति केंद्र की पंजीकरण स्थिति, सेवाओं की गुणवत्ता और मानकों की गहन जांच करेंगी।
🚫 अवैध केंद्रों पर सख्त कार्रवाई
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बिना पंजीकरण या न्यूनतम मानकों को पूरा न करने वाले केंद्रों पर आर्थिक दंड, कानूनी कार्रवाई और तत्काल बंदी की कार्यवाही होगी।
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राज्य में अवैध, अपंजीकृत और मानकहीन नशा मुक्ति केंद्रों को किसी भी सूरत में नहीं चलने दिया जाएगा।
📢 जन-जागरूकता को मिलेगा बल
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सचिव स्वास्थ्य ने विभिन्न विभागों और आम जनता से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
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गांव से शहर तक व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश।
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“जन-जागरूकता ही नशा मुक्ति की सबसे सशक्त दवा है,” डॉ. कुमार ने कहा।
🧠 मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
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प्राधिकरण की बैठक में मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए आगामी कार्य योजना प्रस्तुत की गई।
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राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण को सशक्त, पारदर्शी और संसाधन युक्त बनाने पर विशेष बल दिया गया।
👥 उपस्थित प्रमुख अधिकारी:
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डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं शिक्षा
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डॉ. सुनीता टम्टा, महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य
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डॉ. शिखा जंगपांगी, CEO
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डॉ. सुमित बरमन, संयुक्त निदेशक
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डॉ. पंकज सिंह, सहायक निदेशक
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साथ ही प्राधिकरण और समिति के अन्य सदस्य
🗣️ सरकार का स्पष्ट संदेश:
“नशा मुक्त उत्तराखंड कोई केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, एक सामाजिक आंदोलन है। सभी वर्गों की भागीदारी से ही हम इसे धरातल पर ला सकते हैं।”