देहरादून,
त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में सरकारी गड़बड़ियों को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस ने आज राज्य निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया। पार्टी अध्यक्ष करण माहरा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में कांग्रेस का एक वृहद प्रतिनिधिमंडल राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार से मिला और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग रखी।
🔶 प्रमुख आरोप:
- आरक्षण रोस्टर में धांधली:
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार ने आरक्षण व्यवस्था में जानबूझकर गड़बड़ी करवाई है, जिससे अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग की सीटों का संतुलन बिगड़ गया है। - मतदाता सूचियों में गड़बड़ी:
हाल ही में नगर निकाय चुनावों में मतदान कर चुके शहरी मतदाताओं को ग्रामीण पंचायतों की वोटर लिस्ट में शामिल कर दिया गया है, जो गंभीर उल्लंघन है। - आरक्षण सूची में प्रक्रिया दोष:
अंतरिम आरक्षण सूची पर आपत्तियों को लेकर तय समय सीमा के बाद बिना आपत्ति के अंतिम सूची जारी कर दी गई। - नामांकन प्रक्रिया पर दबाव:
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल के नेता विपक्षी प्रत्याशियों के नामांकन रद्द करवाने के लिए पीठासीन अधिकारियों पर दबाव डालते हैं।
🔷 कांग्रेस की प्रमुख मांगें:
- मतदाता सूची की हार्ड कॉपी तत्काल उपलब्ध करवाई जाए।
- पीठासीन अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए जाएं कि वे निष्पक्ष कार्य करें और किसी वैध नामांकन को राजनीतिक दबाव में खारिज न करें।
- नगर निकाय मतदाताओं को पंचायत चुनावों में वोट और उम्मीदवारी से रोका जाए।
🟢 राज्य निर्वाचन आयोग का आश्वासन:
राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि पंचायत चुनाव पूरी पारदर्शिता व निष्पक्षता से कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सभी जिलाधिकारियों व चुनाव अधिकारियों को पहले ही सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
🧾 प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख नेता:
- करण माहरा – प्रदेश अध्यक्ष
- यशपाल आर्य – नेता प्रतिपक्ष
- सुरेन्द्र शर्मा – प्रदेश सह प्रभारी
- गणेश गोदियाल – पूर्व प्रदेश अध्यक्ष
- सूर्यकांत धस्माना – प्रदेश उपाध्यक्ष (संगठन)
- विक्रम सिंह नेगी, लखपत बुटोला – विधायक
- ज्योति रौतेला – महिला कांग्रेस अध्यक्ष
- नवीन जोशी, गिरिराज किशोर हिंदवाण, शीशपाल बिष्ट, अमरजीत सिंह, मुरारी खंडेलवाल, अखिलेश उनियाल, अश्विनी बहुगुणा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
राजनीतिक विश्लेषण:
उत्तराखंड में पंचायत चुनावों के दौरान प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं करेगी। राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका अब आगामी दिनों में निर्णायक साबित हो सकती है।