देहरादून,
भारत माता के वीर सपूत और कारगिल युद्ध के नायक कैप्टन (से.नि.) योगेन्द्र सिंह यादव ने मंगलवार को श्री दरबार साहिब में माथा टेककर देश और समाज के लिए आशीर्वाद लिया। इस मौके पर उन्होंने श्री दरबार साहिब के सज्जादानशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज से शिष्टाचार भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
🔹 देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता
-
4 जुलाई 1999, कारगिल युद्ध के दौरान बंकर पर चढ़ाई करते हुए दिखाया अद्भुत साहस।
-
17 गोलियां लगने के बावजूद भी दुश्मनों का सफाया कर बंकर पर कब्जा किया।
-
वीरता की इस मिसाल पर भारत सरकार ने उन्हें उच्चतम सैन्य सम्मान ‘परमवीर चक्र’ से नवाजा।
🕊️ आध्यात्मिक आस्था और राष्ट्रभक्ति का संगम
श्री दरबार साहिब की परंपरा के अनुसार कैप्टन योगेन्द्र सिंह यादव का गरिमामयी स्वागत किया गया।
भेंट के दौरान उन्होंने सैन्य जीवन के अनुभव साझा किए और कहा—
“देश की रक्षा सर्वोपरि है। सीमाएं सैनिकों के हौसले से सुरक्षित रहती हैं।”
👏 समाजसेवा की सराहना
उन्होंने SGRR एजुकेशन मिशन, श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय और श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के जनकल्याण कार्यों की खुले दिल से प्रशंसा की।
📢 युवाओं को संदेश:
“देशभक्ति केवल जंग के मैदान में नहीं, जीवन के हर क्षेत्र में होनी चाहिए। युवा पीढ़ी को सेना में आकर राष्ट्र की सेवा करनी चाहिए।”
🔻 पृष्ठभूमि:
-
जन्मस्थान: औरंगाबाद अहीर, बुलंदशहर (उ.प्र.)
-
कैप्टन योगेन्द्र सिंह यादव आज भी देशभर में युवाओं के प्रेरणास्रोत हैं और देशभक्ति के प्रतीक के रूप में जाने जाते हैं।
परमवीर चक्र विजेता का श्री दरबार साहिब में आगमन केवल एक सम्मानजनक भेंट नहीं, बल्कि यह राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम का प्रतीक है। यह मुलाकात युवाओं के लिए प्रेरणा है कि धर्म, राष्ट्र और सेवा एक ही पथ के तीन पड़ाव हैं।
“राष्ट्र पहले, हर हाल में” — कैप्टन योगेन्द्र सिंह यादव की प्रेरणा हर भारतीय के लिए एक जीवंत आदर्श है।