संविदात्मक कार्यों में लगे मजदूरों के आधार कार्ड सत्यापन में ढिलाई पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने जताई कड़ी नाराजगी।
नगर निगम, पालिका व पंचायतों को आज ही रिपोर्ट भेजने का आदेश।
डीएम ने कहा, “यह लापरवाही शासकीय कार्यों की गंभीर उपेक्षा है।”
देहरादून ,
उत्तराखंड शासन ने राज्य भर में संविदा कर्मियों की पहचान और पात्रता सुनिश्चित करने के लिए आधार कार्ड सत्यापन को अनिवार्य किया है। इसके तहत नगर निकायों को अपने यहां कार्यरत सफाईकर्मी, स्ट्रीट लाइट मिस्त्री, ठेके पर लगे अन्य मजदूरों की सत्यापित सूची शासन को भेजनी थी, जिसकी अंतिम तिथि पहले ही बीत चुकी है।
🚨 डीएम की फटकार:
जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि despite बार-बार निर्देशों के बावजूद कई नगर निकायों ने अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं सौंपी है। यह स्थिति “शासन की मंशा के खिलाफ” है और प्रशासनिक लापरवाही की श्रेणी में आती है।
उन्होंने सभी निकायों को आज ही रिपोर्ट भेजने का स्पष्ट निर्देश जारी किया है।
📌 एडीएम की रिपोर्ट:
एडीएम केके मिश्रा ने बताया कि 18 मई को सभी निकायों को निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन अभी तक अधिकांश से कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने इसे “गंभीर प्रशासनिक चूक” बताया है।
🎯 सत्यापन का महत्व:
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संविदा कर्मियों की यथार्थ पहचान और सरकारी योजनाओं की पात्रता जांच के लिए आधार कार्ड सत्यापन जरूरी।
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इससे फर्जी नियुक्तियों, बिचौलियों और अपात्र लाभार्थियों की पहचान में भी मदद मिलेगी।
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राज्य सरकार की मंशा है कि संविदा कर्मियों को समुचित सुरक्षा और पारदर्शिता के साथ काम करने का अवसर मिले।
यह मामला सिर्फ एक प्रशासनिक रिपोर्ट का नहीं, बल्कि राज्य में संविदा पर काम कर रहे हजारों मजदूरों की पहचान और अधिकारों से जुड़ा है। डीएम की सख्ती से यह स्पष्ट है कि सरकार अब इस दिशा में कोई लापरवाही नहीं सहन करेगी।