देहरादून ,
सिटीजन फॉर ग्रीन दून (CFGD) ने हाल ही में देहरादून में पेड़ों और शाखाओं के गिरने से हुई दो लोगों की दुखद मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया है। संस्था ने इसे “पूरी तरह टालने योग्य दुर्घटनाएं” करार देते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति गंभीर संवेदना जताई है और इस मुद्दे को लेकर शहरी नियोजन तंत्र की विफलताओं को उजागर किया है।
🌳 पेड़ कटान नहीं, जिम्मेदार रख-रखाव की ज़रूरत
CFGD ने कहा कि मानसून के समय पेड़ों के गिरने की घटनाएं हर वर्ष होती हैं, लेकिन इसके पीछे कारण उनकी जड़ें कमजोर होना है – जो शहरी विकास परियोजनाओं द्वारा पेड़ों के आसपास की ज़मीन कंक्रीट से ढक देने के चलते होता है। भारत सरकार के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि पेड़ों की जड़ों के चारों ओर 1.5 मीटर तक का क्षेत्र कंक्रीट-मुक्त होना चाहिए, लेकिन देहरादून में यह नियम बड़े पैमाने पर नजरअंदाज किया गया है।
“हर साल एक ही तरह की मौतें होती हैं, जिन्हें सिर्फ़ थोड़ी सी समझदारी और नियमन से रोका जा सकता है। पेड़ ‘खतरनाक’ नहीं होते, उन्हें खतरनाक बनाया जाता है,” – CFGD
🏗 जेसीबी और शहरी विकास बना पेड़ों का दुश्मन
CFGD ने शहरी विकास में लापरवाह तरीकों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सड़कों को चौड़ा करने के नाम पर जेसीबी मशीनों से पेड़ों की जड़ों को क्षति पहुँचाई जाती है, जिससे वे अस्थिर हो जाते हैं। बाद में इन्हें “खतरनाक” घोषित कर गिरा दिया जाता है।
संस्था ने सवाल उठाया कि:
“क्या बाढ़ के दौरान जान लेने वाली नदियों को खतरनाक बताकर रोक दिया जाना चाहिए? क्या दुर्घटनाओं के कारण सड़कों को बंद कर देना चाहिए? जब पेड़ भी जीवन के लिए ज़रूरी हैं, तो उन्हें क्यों नहीं बचाया जा रहा?”
🏛 राष्ट्रपति आशियाना में पेड़ कटान का विरोध
CFGD ने राष्ट्रपति आशियाना परिसर में बिना जरूरत के पेड़ों के काटे जाने का भी विरोध किया। संस्था का दावा है कि राष्ट्रपति महोदय ने स्वयं निर्देश दिए थे कि किसी भी पेड़ को न काटा जाए, बावजूद इसके कई हरे-भरे पेड़ों को काटा गया और अन्य को काटने की योजना बनाई गई।
इस मुद्दे पर CFGD ने माननीय राष्ट्रपति महोदया को पत्र भी लिखा है, जिसमें पर्यावरणीय चिंताओं को स्पष्ट किया गया है।
📜 CFGD की मांगें:
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भारत सरकार के पर्यावरण संबंधी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन
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शहरी पेड़ों के चारों ओर कंक्रीट मुक्त क्षेत्र की अनिवार्यता
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शहरी विकास एजेंसियों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की स्थापना
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पेड़ों की स्वास्थ्य जांच और वैज्ञानिक रख-रखाव व्यवस्था
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दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाए
👥 उपस्थित प्रमुख पर्यावरणविद्:
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डॉ. रवि चोपड़ा
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विजय भट्ट
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इरा चौहान
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हिमांशु अरोड़ा
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रोशन राणा
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अन्य पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता
📌 विशेष टिप्पणी: यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि शहरी पर्यावरण नीति की गंभीर चूक है। CFGD की ओर से उठाए गए प्रश्न न केवल पेड़ों की, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा से भी जुड़े हैं। अगर समय रहते प्रशासन सतर्क नहीं हुआ, तो यह संकट और गहरा सकता है।