देहरादून ,
कारोबारी गिरोह ने फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए करोड़ों की ज़मीनें हथियाईं, पुलिस अधिकारी पर झूठा आरोप लगाने की साजिश
देहरादून ,
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में ज़मीन माफियाओं की एक बड़ी साज़िश का पर्दाफाश हुआ है। कई फर्जी रजिस्ट्रियों और दस्तावेज़ों की जांच कर रहे चौकी प्रभारी देवेश खुगसाल को एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत झूठे आरोप में फंसाने का मामला सामने आया है।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
कारगी बंजारावाला स्थित एक भूमि (खसरा संख्या 1076 च, रकबा 1000 वर्ग मीटर) को लेकर असली मालिक फंदालाल के नाम पर एक फर्जी फंदालाल को खड़ा कर रजिस्ट्री करवाई गई। इस मामले की शिकायत वादी जावेद (निवासी ब्राह्मणवाला) ने की थी, जिन्होंने इस जमीन को खरीदने के लिए नईम खान और मुकर्रम से संपर्क किया था।
वादी ने करीब 28 लाख रुपये देकर रकबा 485 वर्ग मीटर की रजिस्ट्री करवाई, लेकिन कब्ज़े के वक्त जमीन पर किसी और का अधिपत्य पाया गया।
जांच के दौरान सामने आया कि फंदालाल से दी गई पावर ऑफ अटॉर्नी ही फर्जी थी और रजिस्ट्री पूरी तरह से धोखाधड़ी पर आधारित थी। यही गिरोह इसी जमीन की एक और रजिस्ट्री हिमांशु डंगवाल के नाम भी करा चुका था।
कई स्थानों पर किए गए फर्जी सौदे
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राजपुर रोड स्थित खसरा संख्या 11 च की भूमि पर दिगेंद्र सिंह के स्थान पर फर्जी दिगेंद्र खड़ा कर पावर ऑफ अटॉर्नी बनाई गई।
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साईं मंदिर क्षेत्र, खसरा संख्या 717: बलवंत सिंह और हरिराज के नाम की जगह फर्जी आधार कार्ड बनाकर नकली मालिक खड़े किए गए और पावर ऑफ अटॉर्नी दीपक अग्रवाल को दी गई।
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पावर ऑफ अटॉर्नी के ज़रिए दिल्ली निवासी अशोक गुप्ता और श्याम सुंदर नागपाल के नाम रजिस्ट्री कर करोड़ों की ठगी की गई।
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सेलाकुई थाना क्षेत्र में भी नईम खान द्वारा डीके शर्मा से 28 लाख की ठगी का मुकदमा दर्ज है।
चौकी प्रभारी को फंसाने की साजिश
भूमाफियाओं की करतूतों पर शिकंजा कसता देख आरोपी नईम खान और उसके गिरोह ने अपने खिलाफ चल रही जांच से बचने के लिए चौकी प्रभारी देवेश खुगसाल पर ही फर्जी शिकायतें करवानी शुरू कर दीं।
माना जा रहा है कि पुलिस की कार्रवाई से बचने और जांच को पटरी से उतारने के लिए गिरोह ने यह साजिश रची, जिससे ईमानदार अफसर की छवि धूमिल की जा सके।
सभी आरोपी भूमाफिया व गैंगस्टर
जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह पहले से ही कई ठगी और धोखाधड़ी के मामलों में लिप्त रहा है। आरोपियों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और इनकी गतिविधियों पर पहले भी पुलिस की नजर रही है।
देहरादून जैसे शांत शहर में भूमाफियाओं का यह संगठित नेटवर्क न सिर्फ कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहा है, बल्कि ईमानदार अफसरों को भी निशाना बना रहा है। ज़रूरत है कि ऐसे मामलों में उच्चस्तरीय जांच हो और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था पर आम जनता का भरोसा कायम रह सके।