देहरादून। ,
प्रख्यात रसाचार्य, प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस, पद्मश्री से सम्मानित और भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर केआर नारायणन के मानद चिकित्सक रहे वैद्य बालेन्दु प्रकाश ने खनिज और जड़ी बूटी के संयोग से बनी आयुर्वेदिक औषधि का रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने वाला प्रथम प्रामाणिक और विश्वसनीय प्रयास कर इस औषधि का विकास किया है। यहां जानकारी देते हुए पद्मश्री वैद्य बालेन्दु प्रकाश के कार्यालय में वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी के पद पर कार्यरत स्नेहा तिवारी ने बताया कि आयुर्वेद द्वारा रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के दावे गाहे बेगाहे किए जाते रहे है लेकिन उक्त तथ्य को सिद्ध कर दिखाया है मैसूर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित चिकित्सकीय अनुसंधान केंद्र में कार्यरत वैज्ञानिकों के एक समूह ने जिन्होंने चैदह रोग प्रतिरोधक के स्थापित मानको पर एक आयुर्वेदिक औषधि के प्रभाव का अध्ययन किया। उन्होंने बताया कि अट्ठाईस दिनों तक चलने वाले इस परियोजना में पाया गया कि आयुर्वेदिक औषधि के सेवन के उपरांत चूहों में इम्यूनोग्लोब्लिन एएम और जी की मात्रा बढ़ जाती है तथा साथ ही न्यूट्रोफिल नामक रक्त के सफेद कणो में रोगों से लड़ने हेतु चेन बनाने के गुण विकसित हो रोग प्रतिरोधक शक्ति का विकास होता है। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार इस अध्ययन में आयुर्वेदिक औषधि का उल्लेखनीय असर नेचुरल किलर सेल, एंटी हिस्टनिमिब, सेल रेगुलेशन, साइटोकाइन्स और एलर्जी नियामक मानको पर भी पाया गया है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेदिक औषधि में किसी प्रकार के स्टेरॉयड और रासायनिक पदार्थ ना होने की भी पुष्टि हुई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जब खघन पान, रहन सहन के बदलाव तथा बढ़ते प्रदूषण से रोग प्रतिरोधक क्षमता में दिनों दिन कमी आ रही है वहाँ एक सुरक्षित और प्रामाणिक रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने वाले उपयो की नितांत आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पूर्व में यह औषधि मनुष्यों में हुए अनुसंधान में बार बार होने वाली सर्दी में आधुनिक चिकित्सा की औषधि के सापेक्ष बेहतर और सुरक्षित परिणाम दिखा चुकी है। इस अवसर पर वैद्य बालेन्दु प्रकाश ने बताया कि आयुर्वेद की दवाईया कई जीर्ण और जटिल रोगों की सफल चिकित्सा में कारगर है लेकिन वैज्ञानिक प्रमाणों के अभाव में इनका व्यापक प्रसार और लाभ आम् जन तक हीं पहुँच पा रहा है। उन्होंने बताया कि इसलिए उन्होंने अपने संसाधनों से ही इस परियोजना को अपने वैज्ञानिक मित्रों की सहायता से करने का बीड़ा उठाया। उन्होंने कहा कि इस अध्ययन के परिणामों से वो बहुत उत्साहित और प्रसन्न है क्योंकि इन परिणामों से आयुर्वेद जगत में अनुसंधान परक सोच के विकास के साथ आयुर्वेदिक औषधीय के असर के पीछे छिपे विज्ञान को जानने की उत्कंठा आयुर्वेद उद्योग, आयुष मंत्रालय, और अनुसंधान कर्ताओं में होगी और आयुर्वेद के वैज्ञानिक विकास से चिकित्सा के छेत्र में भारत की विश्व गुरु बनने की अवधारणा का विकास होगा।
