संदेशखाली में दलित महिलाओं एवं बच्चों पर अमानवीय कृत्य का किया विरोध
देहरादून ,
पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में दलित महिलाओं एवं बच्चों पर अमानवीय कृत्य के विरोध में सामाजिक समरसता मंच के आह्नान पर विभिन्न संगठनों ने तृणमूल सरकार की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ रैली निकाल जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में आरोपियों के खिलाफ अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम के अन्तर्गत मुकदमा दर्ज करने की मांग की। यहां सामाजिक समरसता मंच के आह्नान पर राष्ट्रीय वाल्मिकी क्रांतिकारी मोर्चा सहित कई सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता घंटाघर स्थित वरिष्ठ आंदोलनकारी रहे स्वर्गीय इन्द्रमणि बडोनी की प्रतिमा के समक्ष धरने पर बैठे और तत्पश्चात जुलूस के रूप में नारेबाजी करते हुए जिला मुख्यालय पहुंचे और वहां पर प्रदर्शन किया। इस अवसर पर सामाजिक समरसता मंच के क्षेत्रीय प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद जायसवाल एवं प्रान्त संयोजक राजेंद्र पंत ने राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन के माध्यम से कहा कि दलित महिलाओं एवं बच्चों पर अत्याचार होता है कई दिनों तक प्राथमिक रिपोर्ट तक दर्ज नहीं होती। जब ईडी आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही करती है तो उन पर हमला किया गया और ऐसी कई घटनाएं हैं जिस पर सरकार ने कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। इस अवसर पर पूर्व दर्जाधारी राज्यमंत्री एवं राष्ट्रीय वाल्मिकी क्रांतिकारी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना ने कहा कि संदेश खाली की घटना मानवता को झकझोर देने वाली है और राज्य सरकार की शह पर दलित एवं आदिवासी महिलाओं पर अत्याचार किए गए और सरकार आरोपियों को बचाने का प्रयास करती रही है। उन्होंने कहा कि यह कृत्य सरकार की दलित विरोधी एवं महिला विरोधी मानसिक को दर्शाता है। इस अवसर पर सामाजिक समरसता मंच ने राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में आरोपियो के खिलाफ अनुसूचित जाति जनजाति निवारण अधिनियम के अन्तर्गत मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई। इस अवसर पर स्वराज विद्वान एवं अखिल भारतीय बौद्ध संघ के जगराम सिंह, जयपाल वाल्मीकि आदि ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर प्रदर्शनकारियों में पूर्व सभासद नीतू वाल्मीकि, जयपाल वाल्मीकि, जगराम सिंह, अनिका क्षेत्री, धर्मपाल घाघट, रविन्द्र वाल्मिकी, राजीव राजौरी, विनोद घाघट, महेश पाल, अज्जू ,कुलवंत सूद, मनोज कुमार आदि अनेक कार्यकर्ता शामिल थे।
