राज्य आंदोलन में प्रमुख योगदान देने वाली शक्तियों की सबसे ज्यादा अवहेलनाः कमला पंत

राज्य गठन के बाद सत्तासीन रहे राजनैतिक दलों ने की सभी निःस्वार्थ संघर्षशील शक्ति व व्यक्ति की अनदेखी
देहरादून ,

उत्तराखंड महिला मंच की प्रदेश संयोजक कमला पंत ने कहा है कि उत्तराखंड राज्य निर्माण आन्दोलन में महिलाओं और युवाओं के सर्व प्रमुख योगदान को सभी भलीभांति जानते ही हैं। उन्होंने कहा कि यह भी जानते हैं कि राज्य गठन के बाद से लेकर सत्तासीन रहे राजनैतिक दलों व उनके नेताओं के निहित स्वार्थी चरित्र के चलते 23 वर्ष हो गए परंतु सबसे ज्यादा अवहेलना देखी अनदेखी महिलाओं व युवाओं के मुद्दों और इसके लिये आवाज उठाने वाले संगठनों की ही हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य में हिमाचल प्रदेश की भांति सशक्त भू कानून की जरूरत है और जिसे शीघ्र ही लागू किया जाना चाहिए। यहां शहीद स्मारक कचहरी में पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की मातृशक्ति यदि राज्य निर्माण के संघर्ष मे इस कदर भारी संख्या मंे, गांव गांव शहर शहर में सडकों पर उतरी थी तो अपने बच्चों के सुखद भविष्य के सपने को लेकर ही उतरी थी। उन्होंने कहा कि उसे उम्मीद थी कि जब उत्तराखंड का अपना राज्य बनेगा, अपनी सरकार होगी तो वह सबसे पहले, वह इसी दिशा मंे काम करेगी। उन्होंने कहा कि कि उत्तराखंड के युवाओं को यहीं रोजगार के अवसर उपलब्ध हों और यहां के सभी बच्चों को अच्छी व सस्ती शिक्षा समान रूप से मिल सके। उन्होंने कहा कि इसी क्रम मे यहां की मातृशक्ति को यह भी विश्वास था कि आने वाली पीढी के उज्जवल भविष्य के लिये, उत्तराखंड एक नशामुक्त और अपराध मुक्त राज्य बन सकेगा। उन्होंने कहा कि उन्हे विश्वास था कि जो भी सरकार बनेगी उसके नेता लोग उत्तराखण्डी होने के नाते निश्चय ही इसी दिशा मे काम करेंगे। उन्होंने कहा कि क्या हुआ और क्या हो रहा है, यह सब आप सब खुद ही देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि उत्तराखंड की मातृशक्ति ने अपने लिये कभी कुछ नहीं मांगा है, उसने जो भी चाहा व मांगा है तो वह अपने बच्चों के लिये ही चाहा है । उन्होंने कहा कि निस्वार्थ भाव व संघर्षशीलता उस का चरित्र रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी ही चरित्रवान संघर्षशील महिलाओं का संगठन उत्तराखंड महिला मंच है। उन्होंने कहा कि यह इस राज्य का दुर्भाग्य है कि ऐसे ही सभी निःस्वार्थ संघर्षशील शक्ति व व्यक्ति जो भी जहां भी हैं, उनकी आवाज की सुनी अनसुनी और उन की सदा देखी अनदेखी ही की जाती रही है। उन्होंने कहा कि उनकी अवहेलना भी करने की ही कोशिश सरकारों के द्वारा की जाती रही है। इस अवसर पर अनेक पदाधिकारी शामिल रहे।

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