एम्स चिकत्सालय में अब तक हुए इन सभी भ्रष्टाचारों की सीबीआई द्वारा की गई जांच सार्वजनिक की जाएः करन
देहरादून ,
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा ने प्रदेश के सरकारी संस्थानों एवं विभिन्न विभागों में बढ़ते भ्रष्टाचार पर कहा है कि जिस प्रकार एम्स ऋषिकेश में गुजरात के गांधीनगर बेस राजदीप इंटरप्राइस को मानव संसाधन की जिम्मेदारी सौंपी गई है वह सरकारी संस्थाओं में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का एक उदाहरण है। आज कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि सीबीआई से जांच के आदेश भी उच्च न्यायालय को देने पड़े हैं। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि ऋषिकेश स्थित एम्स चिकत्सालय में अब तक हुए इन सभी भ्रष्टाचारों की सीबीआई द्वारा की गई जांच सार्वजनिक की जाय तथा नये मामलों क उच्च न्यायालय के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराते हुए भ्रष्टाचार में संलिप्त लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाये। उन्होंने कहा कि गुजरात बेस राजदीप इंटरप्राइस नामक जिस कम्पनी को ऋषिकेश जैसे विश्व स्तरीय चिकित्सा संस्थान में मानव संसाधन विभाग का मुख्य काम सौंपा गया है यह न्यायालय के आदेश पर तीन प्रमुख राज्य क्रमशः गुजरात, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में ब्लैक लिस्टेड है। उन्होंने कहा कि अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन द्वारा संचालित टड हॉस्पिटल में पैसों की अनियमितता तथा नर्सिंग स्टॉफ की तनख्वाह में की गई हेराफेरी के चलते उच्च न्यायालय द्वारा इस फर्म को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद इस फार्म को एम्स जैसे चिकित्सा संस्थान में बड़ी जिम्मेदारी दी गई जहां पर कम्पनी ने आते ही अपना रंग दिखाना शुरू भी कर दिया जब नर्सिंग स्टॉफ के 1200 पदों में से 600 पदों पर केवल राजस्थान के लोगों को भर दिया गया इसमें भी एक ही परिवार के छह लोगों को रोजगार दे दिया गया। उन्होंने कहा कि यह न केवल भ्रष्टाचार की बानगी है अपितु उत्तराखण्ड राज्य के प्रशिक्षित बेरोजगार नौजवानों के साथ भी नारी छलावा है। उन्होंने कहा कि एम्स के अधिशासी अभियंता, जो कि संस्थान के निदेशक के रिश्तेदार बताये जा रहे हैं. द्वारा रंग रोगन के नाम पर ठेकेदार से मोटी रकम की मांग का ऑडियो सार्वजनिक हो चुका है परन्तु अभी तक सरकार द्वारा न तो इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और न ही ठेकेदार के खिलाफ ही कार्रवाई की जा रही है जिसके चलते इन भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद है। उन्होंने कहा कि एम्स में एमआरआई मशीन खरीद घोटाला खुलने के उपरान्त खराब एमआरआई मशीनो से की गई टेस्टिंग की रिपोर्ट मरीजों के परिजनों को नहीं दी जा रही है जिसकी उच्च स्तरीय जांच नितांत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एम्स में उपकरण खरीद घोटाले की सनवीर कौर को लिखे गये पत्र को मी सीबीआई जांच से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार खराब मेडिकल मेडिकल उपकरणों की खरीद में न केवल भारी घोटाले का अंजाम दिया गया बल्कि राज्य के लोगों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ किया जा रहा है जिसके लिए केन्द्र व राज्य सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि आज विश्व स्तरीय चिकित्सा संस्थान ऋषिकेश स्थित एम्स पूरी तरह से भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी एम्स में बेसल सीलिंग उपकरणों की खरीद में भारी वित्तीय अनियमितता के चलते अपराध निरोधक शाखा में मुकदमा दर्ज किया गया था तथा सीबीआई अपराध निरोधक शाखा द्वारा इसकी जांच भी की गई थी परन्तु उसकी जांच कहां तक पहुंची किसी को पता नहीं है। यही नहीं 2018 में एम्स में कंकाल और हड्डियों की खरीद तथा मेडिकल उपकरणों की खरीद में भी भारी घोटाले के चलते संस्थान को करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया इसकी जांच भी सीबीआई द्वारा की गई, परन्तु उसकी जांच का भी अता-पता नहीं है। इस अवसर पर कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।