देहरादून ,
मानसून सीजन को देखते हुए प्रमुख सचिव एवं देहरादून के प्रभारी R. Meenakshi Sundaram ने राजधानी में आपदा प्रबंधन को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को संभावित आपदाओं से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने और लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।
बैठक में जिलाधिकारी Ashish Chauhan के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने मानसून तैयारियों, संवेदनशील क्षेत्रों में किए गए सुरक्षा कार्यों तथा आपदा प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया।
समीक्षा के दौरान सौंग नदी परियोजना, नंदा की चौकी क्षेत्र में चल रहे सुरक्षा कार्यों, नदी सफाई अभियान तथा अन्य बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं की प्रगति का आकलन किया गया। प्रमुख सचिव ने जलभराव की समस्या से निपटने के लिए जिले में उपलब्ध 39 डी-वॉटरिंग पंपों की तैनाती योजना की भी समीक्षा की।
उन्होंने निर्देश दिए कि पिछले वर्षों में जलभराव और जनहानि से प्रभावित क्षेत्रों का विश्लेषण कर संवेदनशील स्थलों पर अग्रिम व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। विशेष रूप से आईएसबीटी क्षेत्र में जलनिकासी की समस्या के समाधान के लिए एमडीडीए, लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम बनाकर समन्वित कार्रवाई करने को कहा गया।
बैठक में जिले के 12 प्रमुख नालों की सफाई एवं सुधार कार्यों को शीघ्र शुरू करने, अल्प अवधि की अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों का डेटा आधारित विश्लेषण करने तथा संभावित जलभराव स्थलों की अग्रिम पहचान सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। इसके अलावा चिन्हित 12 भूस्खलन एवं क्रॉनिक स्लिप जोन पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।
प्रमुख सचिव ने किमाड़ी सहित संवेदनशील क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक समाधान तैयार करने तथा बादल फटने की आशंका वाले क्षेत्रों में निगरानी एवं पूर्व चेतावनी तंत्र को और मजबूत बनाने पर बल दिया। जोखिम वाले विद्यालयों की पहचान कर आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।
स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की समीक्षा करते हुए उन्होंने डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए व्यापक अभियान चलाने, नियमित फॉगिंग कराने और जनजागरूकता कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए। साथ ही उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षित आवागमन की सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा।
प्रमुख सचिव ने यह भी निर्देश दिए कि संभावित आपदाओं के दौरान राहत शिविर, रैन बसेरे और अन्य राहत व्यवस्थाएं पूरी तरह तैयार रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का वार रूम और नियंत्रण कक्ष 24 घंटे सक्रिय रहेगा।
बैठक के बाद प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारी एवं अन्य अधिकारियों के साथ कार्लीगाड़ और माझाड़ा सहित आपदा प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया।