उत्तराखण्ड शासन में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, IAS और PCS अधिकारियों के व्यापक तबादले – uttarakhandawaaz.in

उत्तराखण्ड शासन में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, IAS और PCS अधिकारियों के व्यापक तबादले

देहरादून ,
उत्तराखण्ड शासन ने शनिवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), वित्त सेवा एवं प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) के अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादले किए हैं। कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग-01 द्वारा जारी आदेशों के अनुसार यह प्रशासनिक फेरबदल राज्य की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

IAS संवर्ग में प्रमुख स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। वर्ष 2001 बैच के अधिकारी श्री आर. मीनाक्षी सुन्दरम से प्रमुख सचिव ऊर्जा, नियोजन सहित अन्य अतिरिक्त प्रभार हटाते हुए उन्हें प्रमुख सचिव आवास, आयुक्त आवास एवं मुख्य प्रशासक उत्तराखण्ड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

श्री शैलेश बगौली को सचिव मुख्यमंत्री, गृह, कारागार, सूचना आदि विभागों के दायित्वों से मुक्त कर सचिव पेयजल नियुक्त किया गया है। वहीं श्री सचिन कुर्वे को नागरिक उड्डयन विभाग से हटाकर सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तथा आयुक्त स्वास्थ्य बनाया गया है।

इसके अतिरिक्त सहकारिता, आयुष, खाद्य, नियोजन, सैनिक कल्याण, राज्य संपत्ति, आपदा प्रबंधन और सचिवालय प्रशासन जैसे कई विभागों में भी वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर अदला-बदली की गई है।

राज्य सिविल सेवा (PCS) अधिकारियों के भी तबादले किए गए हैं।
श्री अरविन्द कुमार पाण्डे को मुख्य विकास अधिकारी, नैनीताल नियुक्त किया गया है।
श्री दिनेश प्रताप सिंह को अधिशासी निदेशक, चीनी मिल डोईवाला बनाया गया है।
श्री अनिल कुमार शुक्ला को डिप्टी कलेक्टर हरिद्वार,
श्री दयानन्द को उप मेलाधिकारी, कुम्भ मेला हरिद्वार,
श्री आकाश जोशी को डिप्टी कलेक्टर पौड़ी,
श्री राहुल शाह को डिप्टी कलेक्टर उधमसिंहनगर,
श्री संदीप कुमार को डिप्टी कलेक्टर पौड़ी,
श्री मंजीत सिंह गिल को उप मेलाधिकारी, कुम्भ मेला हरिद्वार तथा
श्री ललित मोहन तिवारी को डिप्टी कलेक्टर पिथौरागढ़ नियुक्त किया गया है।

सरकार ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने वर्तमान पद से कार्यमुक्त होकर तत्काल नवीन तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करें तथा इसकी सूचना कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग को उपलब्ध कराएं।

इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल को शासन की कार्यप्रणाली में तेजी लाने और विभागीय समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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