देहरादून,
देहरादून के तेजतर्रार जिलाधिकारी सविन बंसल एक बार फिर अपने अलग अंदाज़ में नजर आए। बिना किसी सरकारी तामझाम या भारी-भरकम काफिले के, डीएम बंसल विकासखंड मिसराल पट्टी के बटोली गांव पहुंचे — जहां बीते दिनों से गांव का संपर्क पूरी तरह टूट गया था। पहाड़ी पगडंडियों को पार कर, फिसलन भरे रास्तों से होते हुए डीएम ने सीधे प्रभावित ग्रामीणों के बीच पहुंचकर संवेदनशील प्रशासन की मिसाल पेश की।
आपदा में प्रशासनिक सतर्कता की मिसाल
ग्रामीणों से बातचीत में डीएम ने भरोसा दिया कि,
“अब ग्रामीणों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे, प्रशासन हर घर तक खुद पहुंचेगा।”
उन्होंने ग्रामवासियों की मांगों को मौके पर ही मंजूरी देते हुए राहत एवं पुनर्वास के निर्देश भी तत्काल प्रभाव से जारी किए।
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प्रत्येक परिवार को ₹4000 प्रतिमाह किराया सहायता के रूप में कुल ₹3.84 लाख का चेक मौके पर ही वितरित किया गया।
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वर्षा और भूस्खलन के चलते शेरू खाला के खतरनाक रास्ते को प्रशासन ने रातोंरात चालू कराया।
प्रभावी निर्देश व व्यवस्थाएं:
✅ रास्ता दुरुस्ती हेतु 24×7 मशीनरी तैनात
✅ तहसीलदार को क्षेत्र में कैम्प लगाने के निर्देश
✅ गर्भवती महिलाओं व नवजातों हेतु एएनएम की नियमित विजिट
✅ स्कूली बच्चों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था और किराया भुगतान
✅ 20 सोलर लाइट की स्वीकृति डीएम कोटे से
✅ 3.98 लाख लोनिवि को मरम्मत कार्य हेतु दिए गए
✅ झूला पुल और स्थायी पुल निर्माण हेतु लोनिवि को पत्र प्रेषित
जल्द बनेगा अस्थायी हेलीपेड
डीएम ने मौके पर ही निर्देश दिए कि ग्रामवासियों की भागीदारी से 15 दिन में अस्थायी हेलीपेड का निर्माण कराया जाए, जिससे आपात स्थिति में त्वरित राहत संभव हो सके।
स्थानीय स्तर पर मेडिकल इमरजेंसी का समाधान
गांव में मेडिकल सुविधा की तात्कालिक जरूरत को देखते हुए स्थायी मेडिकल सहायता बिंदु स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
निष्कर्ष:
बिना किसी पूर्व सूचना, पगडंडियों से गुजरकर गांव पहुंचना और मौके पर ही निर्णय लेना – डीएम सविन बंसल की प्रशासनिक सक्रियता और संवेदनशीलता का एक बेहतरीन उदाहरण है। आपदा में जहां सरकारी अमला अक्सर दूरी बनाए रखता है, वहीं डीएम बंसल खुद अग्रिम पंक्ति में रहकर कार्य कर रहे हैं।
“प्रशासनिक जिम्मेदारी केवल फाइलों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि वह जनता के बीच जाकर ज़मीनी हकीकत से जुड़नी चाहिए” – यही संदेश दे रहे हैं डीएम बंसल।
