उत्तराखंड में पुरानी बसें बनेंगी इलेक्ट्रिक, परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने कंपनियों के साथ की समीक्षा बैठक

देहरादून,

उत्तराखंड में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने नई पहल शुरू की है। परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने शुक्रवार को विधानसभा स्थित सभागार में विभागीय अधिकारियों और विभिन्न ऑटोमोबाइल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक कर परिवहन निगम की पुरानी बसों को इलेक्ट्रिक बसों में परिवर्तित करने सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।

बैठक में SUN Mobility तथा Mega Nirman Industries के प्रतिनिधियों ने अपनी योजनाओं का प्रस्तुतीकरण दिया।

पुरानी बसों को मिलेगा नया जीवन

परिवहन मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड परिवहन निगम की आउटडेटेड बसों को रेट्रोफिट तकनीक के माध्यम से इलेक्ट्रिक बसों में परिवर्तित करने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि यह पहल राज्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के साथ-साथ परिवहन व्यवस्था को अधिक आधुनिक, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल बनाएगी।

उन्होंने बताया कि सन मोबिलिटी द्वारा पुरानी डीजल बसों को इलेक्ट्रिक बसों में बदलने की तकनीक पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसे विभाग ने सकारात्मक पहल के रूप में देखा है।

चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क पर भी जोर

बैठक में मेगा निर्माण इंडस्ट्रीज ने राज्य के विभिन्न प्रमुख मार्गों पर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा। परिवहन मंत्री ने कंपनी को विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर विभागीय अधिकारियों के साथ साझा करने के निर्देश दिए, ताकि परियोजना की व्यवहार्यता का परीक्षण किया जा सके।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी बस सेवा

बैठक में Jaipur City Transport Services Limited की ओर से इलेक्ट्रिक बसों में आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर भी प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें बसों की लाइव लोकेशन ट्रैकिंग, ऑनलाइन टिकट बुकिंग, डिजिटल निगरानी और अन्य स्मार्ट सुविधाओं को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे यात्रियों को अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी सेवाएं मिल सकें।

अधिकारी और कंपनियों के प्रतिनिधि रहे मौजूद

बैठक में राज्य स्तरीय परिवहन प्राधिकरण के अध्यक्ष संजय अरोड़ा, परिवहन निगम की प्रबंध निदेशक रीना जोशी, अपर आयुक्त एस. के. सिंह सहित परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न ऑटोमोबाइल कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सरकार का मानना है कि यदि यह योजना लागू होती है तो पुरानी बसों का पुनः उपयोग संभव होगा, परिचालन लागत में कमी आएगी, प्रदूषण घटेगा और उत्तराखंड में हरित एवं आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई गति मिलेगी।

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