देहरादून ,
राजधानी देहरादून के सहस्त्रधारा रोड क्षेत्र से 15 वर्षीय नाबालिग के कथित अपहरण के मामले में दून पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि नाबालिग की मां ने ही आर्थिक तंगी के चलते अपनी बेटी का डेढ़ लाख रुपये में सौदा कर दिया था। बाद में पूरी रकम नहीं मिलने और पुलिस कार्रवाई के डर से उसने बेटी के अपहरण की झूठी कहानी गढ़कर थाना राजपुर में मुकदमा दर्ज करा दिया।
पुलिस ने मोबाइल सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और मैनुअल पुलिसिंग की मदद से मामले की गहन जांच की और नाबालिग को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से सकुशल बरामद कर लिया। इस दौरान पुलिस ने लवी कुमार और मनीष को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया।
जांच में पता चला कि पिंकी मलिक नामक महिला ने नाबालिग की मां नीलम देवी से डेढ़ लाख रुपये में उसका सौदा किया था। इसके बाद पिंकी ने नाबालिग को लवी कुमार के हवाले कर दिया, जिसने उसे दो लाख रुपये में मनीष को बेच दिया। पुलिस के अनुसार, मनीष ने विवाह करने के उद्देश्य से नाबालिग को खरीदा था।
पूछताछ में नीलम देवी ने स्वीकार किया कि उसकी मुलाकात एक समारोह में पिंकी मलिक से हुई थी। बातचीत के दौरान पिंकी ने एक युवती की आवश्यकता बताई और बदले में अच्छी रकम देने का प्रस्ताव रखा। आर्थिक तंगी से जूझ रही नीलम ने अपनी 15 वर्षीय बेटी के बदले डेढ़ लाख रुपये की मांग की, जिस पर सौदा तय हो गया।
पुलिस के मुताबिक, सौदे के बाद नीलम देवी को केवल 80 हजार रुपये ही मिले थे। शेष राशि नहीं मिलने और अपराध उजागर होने के भय से उसने अपनी बेटी के अपहरण की झूठी शिकायत दर्ज कराकर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस की सतर्क जांच ने पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया।
मामले में पुलिस ने नीलम देवी, पिंकी मलिक, लवी कुमार और मनीष को गिरफ्तार कर लिया है। विवेचना के दौरान मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के साथ पॉक्सो अधिनियम की धाराएं भी जोड़ दी गई हैं।
पुलिस अब आरोपियों से गहन पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या वे पहले भी नाबालिगों की खरीद-फरोख्त जैसे मामलों में शामिल रहे हैं या इस पूरे गिरोह से अन्य लोग भी जुड़े हुए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है।