पत्र में किसान मंडियों में धान की तौल में बरती जा रही अनियमितता एवं किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग की
देहरादून ,
उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा ने उत्तराखण्ड राज्य की किसान मंडियों में धान की तौल में बरती जा रही अनियमितता एवं किसानों को हो रही परेशानी के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर किसानों को हो रही समस्याओं का समाधान कराये जाने की मांग की है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लिखे पत्र में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि सत्र 2023-24 की धान खरीद का सिलसिला शुरू हो चुका है तथा प्रदेशभर के किसानों द्वारा अपनी कमरतोड़ मेहनत से तैयार फसल प्रदेश की विभिन्न मंडियों में विक्रय हेतु लाई जा जानी प्रारम्भ हो चुकी है, परन्तु प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेशभर की मंडियों में निर्धारित धान खरीद केन्द्रों पर धान की तौल सुचारू रूप से न होने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है जिसके चलते प्रदेशभर के किसान आन्दोलित हैं। उन्होंने कहा कि इसी संदर्भ में किसानों द्वारा बीते दिनों नवीन मंडी सितारगंज जिला ऊधमसिंहनगर में सांकेतिक धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया जिसमें स्वयं उन्होंने प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम में बडी संख्या में उपस्थित किसानों द्वारा धान खरीद केन्द्रों में धान की तौल में बरती जा रही अनियमितता एवं हीला-हवाली के साथ ही धान की तौल सुचारू न किये जाने पर आक्रोष व्यक्त करते हुए सरकार से किसानों की समस्याओं का समाधान कराये जाने की मांग की गई। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने यह भी कहा कि धान किसानों द्वारा इस बात पर भी नाराजगी व्यक्त की गई कि स्थानीय आढ़तियों द्वारा धान में नमी होने का हवाला देते हुए तौल में 15 प्रतिशत की कटौती की जा रही है और इसके साथ ही कच्चा आढतियों एवं धान मिलों द्वारा निर्धारित दामों से कम दामों में धान की खरीद की जा रही है जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है जोकि न्याय संगत प्रतीत नहीं होता है। इस अवसर पर करन माहरा ने भाजपा सरकार पर यह भी आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के शासन में सबसे अधिक उत्पीड़न किसानों का हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा संसद के दोनों सदनों में संख्या बल के आधार पर संसदीय प्रणाली व प्रजातंत्र को धता बताते हुए किसान विरोधी तीन काले कानून पारित किए गए। उन्होंने कहा कि देश भर में 62 करोड़ किसान-मजदूर व 250 से अधिक किसान संगठन इन काले कानूनों के खिलाफ लगातार दो साल से आवाज उठाते रहे तथा कई किसानों को अपना सर्वस्व न्यौछावर करना पड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अन्नदाता किसान की बात सुनना तो दूर, संसद में उनके नुमाईंदो की आवाज को दबाने तथा सत्ता के बल पर सड़क पर आन्दोलनरत किसानों को गाडी से कुचल कर निर्मम हत्या जैसे जघन्य अपराध किये गये।