देहरादून ,
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएचए) उत्तराखंड ने प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई), अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना (एएयूवाई) और राज्य सरकारी स्वास्थ्य योजना (एसजीएचएस) के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए बरेली के एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज तथा देहरादून के ओजस्वी और अरिहंत अस्पताल की संबद्धता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी है। वहीं, बलूनी अस्पताल पर 86,250 रुपये का जुर्माना लगाते हुए 15 दिनों के भीतर कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
रेफरल मरीजों को लौटाने और कैशलेस इलाज से इनकार पर एसआरएमएस पर कार्रवाई
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुसार पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों से रेफर होकर पहुंचे मरीजों को भर्ती करने और कैशलेस इलाज देने से इनकार किए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। जांच में सामने आया कि कई मामलों में वैध रेफरल पत्रों को स्वीकार नहीं किया गया और मरीजों को नए रेफरल लाने के लिए कहा गया।
चंपावत जिले के एक मरीज को टनकपुर उप जिला चिकित्सालय से रेफर किए जाने के बावजूद भर्ती नहीं किया गया। इसके अलावा मोरपाल कश्यप, लक्ष्मी देवी, सुरेश राम और सूरज गुप्ता समेत कई लाभार्थियों के मामलों का भी उल्लेख किया गया है। नैनीताल निवासी महेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि उनके पिता से पीएम-जेएवाई के तहत भर्ती होने के बावजूद इलाज के लिए करीब 1.44 लाख रुपये वसूले गए। अस्पताल को सात दिनों के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। निलंबन अवधि में नए मरीज भर्ती नहीं किए जा सकेंगे, जबकि पहले से भर्ती मरीजों का उपचार जारी रहेगा।
ओजस्वी अस्पताल पर 60 हजार रुपये का जुर्माना
देहरादून स्थित ओजस्वी अस्पताल की संबद्धता भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है। जांच में पाया गया कि अस्पताल ने एक आयुष्मान लाभार्थी से 12 हजार रुपये वसूले थे, जो कैशलेस उपचार के नियमों का उल्लंघन है। हालांकि बाद में यह राशि लौटा दी गई, लेकिन यह कार्रवाई प्राधिकरण के हस्तक्षेप के बाद की गई।
निरीक्षण के दौरान रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर (आरएमओ) की उपलब्धता अपर्याप्त पाई गई। एचईएम पोर्टल पर दर्ज चिकित्सक का मोबाइल नंबर सक्रिय नहीं मिला और निरीक्षण के समय संबंधित चिकित्सक मौजूद भी नहीं थे। अस्पताल पर वसूली गई राशि का पांच गुना यानी 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है और 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
संक्रमण नियंत्रण और डायलिसिस व्यवस्था में खामियों पर अरिहंत अस्पताल निलंबित
देहरादून के अरिहंत अस्पताल की संबद्धता डायलिसिस यूनिट और संक्रमण नियंत्रण से जुड़ी गंभीर कमियों के कारण निलंबित कर दी गई है। निरीक्षण में डायलिसिस बेडों के बीच पर्याप्त दूरी नहीं मिली, जबकि प्रक्रियाओं की निगरानी के लिए कोई नामित मेडिकल अधिकारी भी मौजूद नहीं था।
इसके अलावा पीपीई किट के उपयोग, डायलिसिस मशीनों की संक्रमणमुक्त करने की प्रक्रिया, संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था और एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से अनिवार्य सत्यापन में भी कमियां पाई गईं। अस्पताल को 15 दिनों के भीतर सुधारात्मक रिपोर्ट और अद्यतन मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
बलूनी अस्पताल पर 86,250 रुपये का जुर्माना, 15 दिन का अल्टीमेटम
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने बलूनी अस्पताल पर एक आयुष्मान लाभार्थी से दवाइयों और जांच के नाम पर 17,250 रुपये की अवैध वसूली के मामले में 86,250 रुपये का जुर्माना लगाया है। अस्पताल ने रकम वापस करने का दावा किया, लेकिन इसके समर्थन में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल में रैंप, आईसीयू की साफ-सफाई, हाउसकीपिंग व्यवस्था और तीमारदारों के लिए उपलब्ध सुविधाओं में भी कमियां पाई गईं। आईसीयू में ऑक्सीजन, एयर और सक्शन पाइपलाइन व्यवस्था को भी मानकों के अनुरूप सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।
एसएचए ने अस्पताल को 15 दिनों के भीतर सभी कमियां दूर करने का अल्टीमेटम दिया है। निर्धारित समय में सुधार नहीं होने की स्थिति में अस्पताल की संबद्धता भी निलंबित की जा सकती है।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि आयुष्मान और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के लाभार्थियों को कैशलेस उपचार उपलब्ध कराना अनिवार्य है और नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।