देहरादून ,
उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा है। राज्य में बिजली की दरों में 34 पैसे से लेकर 1.44 रुपये प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। यह वृद्धि विद्युत खरीद लागत समायोजन (FPCA) के तहत की गई है और आदेश जारी होते ही तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
यह आदेश मुख्य अभियंता (वाणिज्य) एन.एस. बिष्ट की ओर से जारी किया गया है। इस फैसले से राज्य के घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक समेत लाखों उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
नई दरों के अनुसार व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली 1.34 रुपये प्रति यूनिट महंगी हो गई है, जबकि औद्योगिक इकाइयों के लिए 1.24 रुपये प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है। वहीं अस्थायी कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए बिजली 1.44 रुपये प्रति यूनिट महंगी हो गई है।
गरीब परिवारों को भी राहत नहीं मिली है। गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए भी बिजली की दर 34 पैसे प्रति यूनिट बढ़ा दी गई है।
बिजली दरों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर उद्योग जगत ने नाराजगी जतानी शुरू कर दी है। स्टील निर्माता संघ के उपाध्यक्ष पवन अग्रवाल का कहना है कि हर महीने बिजली दरों में वृद्धि उद्योगों को हतोत्साहित करने वाला कदम है। उनका कहना है कि जब सालाना दरों में पहले ही वृद्धि की जाती है तो हर महीने अतिरिक्त बढ़ोतरी का कोई औचित्य नहीं बनता। बढ़ते बिजली बिलों से उत्पादन लागत बढ़ रही है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल होता जा रहा है।
वहीं Uttarakhand Power Corporation Limited (यूपीसीएल) के अधिकारियों का कहना है कि बिजली खरीद की लागत में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। इसी कारण फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (FPCA) के माध्यम से हर महीने दरों में बदलाव करना पड़ता है।
हालांकि ऊर्जा निगम के इस तर्क से आम उपभोक्ता और व्यापारी संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं और फैसले को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। दूसरी ओर अप्रैल में प्रस्तावित वार्षिक बिजली दरों में संभावित बढ़ोतरी की चर्चा ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।