सब-रजिस्ट्रार की अनुपस्थिति में लिपिक द्वारा अवैधानिक निबंधन, करोड़ों की स्टाम्प चोरी उजागर

डीएम के औचक निरीक्षण में निबंधन कार्यालय की गंभीर अनियमितताएं आईं सामने

देहरादून ,

निबंधन कार्यालय में सब-रजिस्ट्रार की अनुपस्थिति में लिपिक द्वारा अवैधानिक रूप से विलेखों का निबंधन किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिलाधिकारी द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए, जहां नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए करोड़ों रुपये की स्टाम्प चोरी किए जाने का खुलासा हुआ।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने निबंधक लिपिक से जब संपत्ति मूल्यांकन संबंधी ज्ञान के बारे में पूछा तो वह संतोषजनक उत्तर नहीं दे सकी। डीएम के सवाल पर कि “जब आपको संपत्ति मूल्यांकन का ज्ञान ही नहीं है तो स्टाम्प शुल्क कैसे पास किया गया”, इस पर निबंधक लिपिक बगले झांकती नजर आई।

जांच में सामने आया कि औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित भूखंडों को आवासीय दरों पर छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर कई रजिस्ट्रियां की गईं, जिससे करोड़ों रुपये की स्टाम्प चोरी हुई। निरीक्षण के समय उपस्थित फरियादियों ने अपनी आपबीती सुनाई और कई पीड़ितों ने लिखित एवं मौखिक बयान भी दर्ज कराए।

डीएम के निरीक्षण में यह भी पाया गया कि कई महीनों से लंबित मूल अभिलेख आवेदकों को वापस नहीं किए गए थे, जबकि नियमानुसार मूल दस्तावेज अधिकतम तीन दिन के भीतर लौटाए जाने चाहिए। इसके विपरीत सैकड़ों मूल विलेख कार्यालय की अलमारियों में धूल फांकते मिले।

मूल अभिलेख लौटाने और रजिस्ट्री की नकल प्रदान करने में आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। अर्जेंट श्रेणी में 24 घंटे के भीतर मिलने वाली रजिस्ट्री की नकल कई मामलों में महीनों甚至 वर्षों से लंबित पाई गई।

निरीक्षण के दौरान कार्यालय में एक ‘घोस्ट कार्मिक’ भी पाया गया, जिसके पास न तो कोई नियुक्ति पत्र था और न ही उपस्थिति पंजिका में उसका नाम दर्ज था। इस पर जिलाधिकारी ने सभी कार्मिकों का रिकॉर्ड तत्काल तलब किया।

गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए जिलाधिकारी ने कार्यालय से संबंधित कंप्यूटर, लंबित मूल अभिलेख तथा कूटरचित विलेख जब्त करने के निर्देश दिए। प्रशासनिक स्तर पर पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।

यह मामला न केवल निबंधन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि आमजन के विश्वास और राजस्व हितों के साथ हुए बड़े खिलवाड़ को भी उजागर करता है।

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