कोविड से लेकर सामान्य आपात स्थितियों तक, तकनीक, प्रशिक्षण और प्रतिबद्धता ने बदली तस्वीर
देहरादून ,
पर्वतीय, दुर्गम और मौसम की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड जैसे राज्य में त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना एक कठिन कार्य है। बावजूद इसके, 108 आपातकालीन सेवा ने प्रशासनिक प्रतिबद्धता, तकनीकी नवाचार और प्रशिक्षित मानव संसाधन के बल पर इस चुनौती को अवसर में बदला है। बीते पाँच वर्षों में 108 सेवा राज्य के नागरिकों के लिए संकट की घड़ी में एक भरोसेमंद जीवनरेखा बनकर उभरी है।
संकट की घड़ी में जीवनरेखा बनी 108 सेवा
सड़क दुर्घटनाएँ, हृदयाघात, प्रसव संबंधी आपात स्थितियाँ, गंभीर बीमारियाँ, प्राकृतिक आपदाएँ अथवा भीड़भाड़ वाले धार्मिक और राष्ट्रीय आयोजन—हर परिस्थिति में 108 सेवा 24×7 तत्परता के साथ सक्रिय रही है। सेवा का उद्देश्य केवल मरीज को अस्पताल तक पहुँचाना नहीं, बल्कि “गोल्डन ऑवर” के भीतर गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराकर जीवन रक्षा सुनिश्चित करना रहा है।
कोविड काल में कड़ी परीक्षा
वर्ष 2020-21 में 108 सेवा के अंतर्गत कुल 1,06,768 आपात मामले दर्ज किए गए। कोविड-19 महामारी के दौरान सीमित संसाधनों और अत्यधिक दबाव के बावजूद सेवा ने राज्यभर में निर्बाध आपात स्वास्थ्य सहायता प्रदान की और अपनी उपयोगिता सिद्ध की।
2021-22: मामलों में तेज़ वृद्धि
वर्ष 2021-22 में आपात मामलों की संख्या में लगभग 48 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह आँकड़ा 1,58,070 तक पहुँच गया। कोविड की दूसरी लहर, गंभीर मरीजों की बढ़ती संख्या, ऑक्सीजन सपोर्ट और अस्पताल रेफरल की मांग ने 108 सेवा की कार्यक्षमता की वास्तविक परीक्षा ली, जिसमें सेवा पूरी तरह सफल रही।
2022-23: पाँच वर्षों का सर्वाधिक आंकड़ा
वर्ष 2022-23 में 1,62,301 आपात मामलों के साथ पाँच वर्षों का सर्वाधिक आंकड़ा दर्ज हुआ। महामारी के बाद उत्पन्न जटिल स्वास्थ्य स्थितियों, पुरानी बीमारियों के गंभीर मामलों और सामान्य आपात परिस्थितियों को 108 सेवा ने समान दक्षता से संभाला।
2023-24 और 2024-25: सकारात्मक गिरावट
वर्ष 2023-24 में आपात मामलों की संख्या घटकर 1,51,276 और 2024-25 में 1,38,369 रही। विशेषज्ञों के अनुसार यह गिरावट किसी कमजोरी का संकेत नहीं, बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों, समय पर प्राथमिक उपचार, स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों की मजबूती और प्रभावी कॉल ट्रायजिंग प्रणाली की सफलता को दर्शाती है।
भविष्य की दिशा
आने वाले समय में 108 सेवा को और अधिक तकनीक-सक्षम बनाने, प्रतिक्रिया समय घटाने, दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर पहुँच और मानव संसाधन के निरंतर प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक को समय पर और गुणवत्तापूर्ण आपात चिकित्सा सहायता मिलती रहे।