देहरादून ,
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद निरंजनी के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि अखाड़े कुंभ परंपरा के वास्तविक संरक्षक हैं और पूरा देश हरिद्वार के अर्द्धकुंभ को नई उम्मीदों और उत्साह के साथ देख रहा है। उन्होंने समय रहते तैयारियों की शुरुआत करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सराहना की।
मुख्यमंत्री धामी ने संत समुदाय को आश्वस्त किया कि कुंभ से जुड़ी हर सलाह और पारंपरिक मार्गदर्शन का सम्मानपूर्वक पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अर्द्धकुंभ 2027 एक शानदार और भव्य आयोजन होगा, जिसकी प्रशासनिक तैयारियाँ युद्धस्तर पर आगे बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी पुष्टि की कि मेले की औपचारिक शुरुआत 13 जनवरी 2027, मकर संक्रांति के दिन होगी।
पहली बार चार शाही स्नान — परंपरा में ऐतिहासिक विस्तार
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय रहा अर्द्धकुंभ 2027 के विस्तृत स्नान कैलेंडर की घोषणा। इस बार संत समाज ने परंपरागत ढाँचे में एक बड़ा बदलाव करते हुए चार शाही अमृत स्नान तय किए हैं। यह सदियों पुरानी परंपराओं में एक अद्वितीय और उल्लेखनीय कदम माना जा रहा है, जिससे अर्द्धकुंभ का महत्व और बढ़ गया है।
मुख्य पर्व स्नान तिथियां
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14 जनवरी 2027 — मकर संक्रांति
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6 फरवरी 2027 — मौनी अमावस्या
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11 फरवरी 2027 — बसंत पंचमी
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20 फरवरी 2027 — माघ पूर्णिमा
चार शाही अमृत स्नान
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6 मार्च 2027 — महाशिवरात्रि (पहला अमृत स्नान)
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8 मार्च 2027 — सोमवती/फाल्गुन अमावस्या (दूसरा अमृत स्नान)
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14 अप्रैल 2027 — मेष संक्रांति/वैशाखी (तीसरा अमृत स्नान)
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20 अप्रैल 2027 — चैत्र पूर्णिमा (चौथा अमृत स्नान)
अन्य विशेष पर्व
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7 अप्रैल — नव संवत्सर
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15 अप्रैल — राम नवमी
संत समुदाय ने इस विस्तृत कैलेंडर पर प्रसन्नता व्यक्त की, क्योंकि इससे श्रद्धालुओं को यात्रा और आयोजन की योजना बनाने में सरलता होगी। साथ ही उम्मीद है कि ये ऐतिहासिक निर्णय हरिद्वार अर्द्धकुंभ 2027 को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाएंगे।