देहरादून ,
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य प्रशासन को स्पष्ट और कठोर संदेश देते हुए कहा कि अब समय है गति, पारदर्शिता और परिणाम आधारित कार्य प्रणाली का। उन्होंने IAS अधिकारियों की अनौपचारिक बैठक में कहा कि फाइलों में अनावश्यक देरी और उदासीन कार्यशैली अब स्वीकार्य नहीं है।
फाइलों में देरी न हो, निर्णय लक्ष्य आधारित हों
सीएम धामी ने कहा कि प्रशासन का हर निर्णय जनता की सुविधा और व्यवस्था की पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए होना चाहिए।
उन्होंने निर्देश दिए कि—
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फाइलों का निस्तारण समयबद्ध और तेज गति से हो,
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योजनाओं के परिणाम जमीनी स्तर पर तुरंत दिखाई दें,
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अनावश्यक लंबित रखने की प्रवृत्ति समाप्त हो।
“ये केवल नौकरी नहीं, समाज सेवा का दायित्व है”
सीएम धामी ने अधिकारियों को उनके कर्तव्य का स्मरण कराते हुए कहा—
“पद की प्रतिष्ठा कार्यकाल तक है, लेकिन कार्यों का सम्मान आजीवन रहता है।”
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को अपने निर्णयों में संवेदनशीलता, दूरदृष्टि और ईमानदारी को प्राथमिकता देनी चाहिए क्योंकि उनके फैसले लाखों लोगों के जीवन पर प्रभाव डालते हैं।
“ये दशक उत्तराखंड का दशक है”—मुख्यमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी के कथन “ये दशक उत्तराखंड का दशक है” का उल्लेख करते हुए धामी ने कहा कि आने वाले पाँच वर्ष राज्य के लिए निर्णायक होंगे।
उन्होंने कहा—
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राज्य तेज़ विकास की दिशा में कदम बढ़ा रहा है,
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प्रशासन को “विकल्प रहित संकल्प” के मंत्र के साथ कार्य करना होगा।
प्रेरक उदाहरणों का उल्लेख
सीएम धामी ने टी. एन. शेषन, सूर्यप्रताप सिंह और नृपेंद्र मिश्र जैसे प्रशासनिक अधिकारियों का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी ईमानदारी और जनसेवा ने उन्हें समाज में अमर स्थान दिया।
बैठक में प्रमुख अधिकारी उपस्थित
बैठक में प्रदेश के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन सहित राज्य के वरिष्ठ एवं युवा IAS अधिकारी उपस्थित रहे। यह बैठक Administrative Officer Conference (AOC) के संदर्भ में आयोजित की गई।
मुख्य संदेश
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जनता का विश्वास सर्वोपरि
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तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य
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प्रशासनिक उदासीनता बर्दाश्त नहीं
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नियमित समीक्षा, मॉनिटरिंग और साइट निरीक्षण अनिवार्य