देहरादून / चमोली,
सिखों के पवित्र तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब में शुक्रवार को इस वर्ष की अंतिम अरदास के साथ कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इसके साथ ही समीपवर्ती लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी विधिवत रूप से बंद कर दिए गए।
हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के अनुसार, शुक्रवार दोपहर 1 बजे गुरुग्रंथ साहिब को सचखंड में सुशोभित करने के बाद कपाट बंद किए गए। इससे पहले सुबह सुखमणी साहिब के पाठ और कीर्तन दरबार का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस भावुक क्षण के साक्षी बने।
ट्रस्ट अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने बताया कि इस वर्ष 25 मई को कपाट खोले गए थे और 10 अक्तूबर को बंद हुए, यानी इस बार 139 दिन तक यात्रा चली। इस अवधि में लगभग 2 लाख 72 हजार श्रद्धालुओं ने हेमकुंड साहिब में मत्था टेका।
इसी परिसर में स्थित लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी आज 12 बजकर 31 मिनट पर बंद कर दिए गए। दोनों धार्मिक स्थलों पर कपाट बंद होने की रस्में परंपरागत रीति से पूरी की गईं।
पिछले दिनों हुई भारी बर्फबारी से हेमकुंड घाटी और आसपास का पूरा इलाका सफेद बर्फ की चादर से ढक गया है। ठंडी हवाओं और गिरती बर्फ के बीच श्रद्धालुओं ने अंतिम दर्शन किए और “बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा।
कपाट बंद होने के बाद अब गुरु जी का प्रकाश स्वरूप शीतकालीन गद्दी स्थल गुरुद्वारा श्री गोविंदघाट साहिब में विराजमान रहेगा, जहां पूरे सर्दी के मौसम में अरदास और सेवा का सिलसिला जारी रहेगा।