देहरादून ,
पेपर लीक प्रकरण के विरोध में उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के तहत धरने पर बैठे बेरोजगार युवाओं के आंदोलन में अब वामपंथी टूल किट्स की एंट्री हुई है। इनका विरोध-भड़काऊ अंदाज और नारे जेएनयू, जामिया और शाहीन बाग जैसे अन्य आंदोलन स्थलों से प्रेरित दिखाई दे रहे हैं।
बताया जा रहा है कि पहले बेरोजगार संघ के नेतृत्व में आंदोलन शुरू हुआ था, जिसे अब उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के नाम से आगे बढ़ाया जा रहा है। इस मोर्चे में वामपंथी विचारधारा के युवाओं के शामिल होने से सवाल उठ रहे हैं कि इनके फंडिंग स्रोत क्या हैं और कौन इन्हें निर्देश दे रहा है।
समाचारों के अनुसार, ये टूल किट्स विशेष रूप से उन राज्यों में आंदोलन खड़ा करने के उद्देश्य से सक्रिय हैं, जहां बीजेपी की सरकारें हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को जुटाना और उन्हें सरकार विरोधी नारे लगाने के लिए उकसाना इस रणनीति का हिस्सा है।
अधिकारियों का कहना है कि आंदोलन के दौरान भगवा झंडों को निशाना बनाया गया और कुछ क्षेत्रों में ऐसे झंडे ले जाने वाले लोगों को प्रवेश नहीं दिया गया। पेपर लीक मामले में खालिद मलिक और उसकी बहन साबिया के नाम सामने आने के बाद भाजपा ने इसे नकल जेहाद करार दिया।
धामी सरकार ने पिछले चार वर्षों में 25 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता के साथ नियुक्त कर सफलता हासिल की है। इस उपलब्धि को कमजोर करने के प्रयास के तहत वामपंथी टूल किट्स सक्रिय होने की चर्चा है।