देहरादून ,
केदारनाथ धाम के गर्भगृह को स्वर्ण मंडित कराने को लेकर मचे विवाद पर शासन के आदेश से की गई गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की जांच रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई है। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने न तो सोना खरीदा और न ही अपने स्तर से इसका उपयोग कराया।
जांच में क्या पाया गया?
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बीकेटीसी ने केवल शासन के निर्देशों के तहत दानीदाता को सहयोग प्रदान किया।
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दानदाता दलीप लाखी की फर्म जेम्स इम्पैक्स प्रा. लि. और उसके अधिकृत महालक्ष्मी अंबा ज्वैलर्स, नई दिल्ली के कारीगरों ने यह कार्य किया।
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कार्य शुरू होने से पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग और सीबीआरआई रुड़की की टीम ने निरीक्षण कर कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी थी।
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पहले गर्भगृह की 230 किलो चांदी की प्लेटें उतारी गईं और मंदिर भंडार गृह में सुरक्षित रखी गईं।
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इसके बाद तांबे की प्लेटों पर दिल्ली में स्वर्ण बर्क चढ़ाया गया और इन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच वापस लाकर घोड़े-खच्चरों से गौरीकुंड से केदारनाथ पहुंचाया गया।
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बीकेटीसी कर्मियों और पुलिस की निगरानी में गर्भगृह में प्लेटें स्थापित की गईं।
बिल और स्टॉक रजिस्टर का विवरण
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सोने के बर्क का कुल वजन 23.777 किलो और तांबे का वजन 1001.300 किलो दर्ज किया गया है।
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बीकेटीसी ने इन्हें अपने स्टॉक रजिस्टर में भी शामिल किया है।
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जांच रिपोर्ट में दानदाता द्वारा उपलब्ध कराए गए बिल भी संलग्न किए गए हैं।
प्रक्रिया कैसे शुरू हुई?
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4 अगस्त 2022: तत्कालीन बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने सचिव, संस्कृति व धर्मस्व को पत्र भेजकर दानीदाता की मदद से गर्भगृह को स्वर्ण मंडित करने का अनुरोध किया।
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3 सितम्बर 2022: स्वयं दानदाता दलीप लाखी ने सचिव, संस्कृति को पत्र लिखकर सहमति दी।
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इसके बाद सचिव हरिचंद्र सेमवाल ने जिलाधिकारी और बीकेटीसी सीईओ को दानीदाता की फर्म को अपेक्षित सहयोग देने के निर्देश दिए।