हरिद्वार।
पितृ पक्ष की श्राद्ध अमावस्या पर रविवार को तीर्थनगरी हरिद्वार में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हर की पौड़ी, ब्रह्मकुंड, कुशाव्रत घाट और नारायणी शिला पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल समेत देशभर से आए भक्तों ने गंगा स्नान कर पिंडदान और तर्पण कर पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
भावनाओं का महास्नान
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श्रद्धालुओं ने हवन, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन कर पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
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नारायणी शिला पर बने “पितरों के घर” की सफाई और पूजन कर भक्त भावुक हो उठे।
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कई श्रद्धालुओं की आंखें पितरों को याद कर नम हुईं, वहीं गंगा तट पर धार्मिक आस्था की गूंज सुनाई दी।
हर रास्ता हर की पौड़ी की ओर
सुबह से ही रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और आसपास के गांवों से आ रहे श्रद्धालुओं की भीड़ गंगा घाटों पर उमड़ पड़ी। नारायणी शिला और ब्रह्मकुंड पर लंबी कतारों में लोग धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।
धार्मिक विधि-विधान और मान्यता
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स्थानीय ब्राह्मणों और पंडितों ने विधिपूर्वक तर्पण और पिंडदान संपन्न कराया।
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धार्मिक मान्यता है कि श्राद्ध अमावस्या पर गंगा स्नान और तर्पण से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।
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इसे पितृ तृप्ति का महापर्व भी कहा जाता है।