आपदा से पहले सतर्कता अनिवार्य: जल छोड़े जाने की पूर्व सूचना और रियल टाइम डाटा साझा करने के निर्देश

देहरादून, 
उत्तराखंड में आगामी मानसून सीजन के मद्देनज़र आपदा प्रबंधन को मजबूत करते हुए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने शुक्रवार को सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक के दौरान राज्य की सभी जल विद्युत और सिंचाई परियोजनाओं को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जब भी किसी बांध परियोजना से जल छोड़ा जाए, उसकी पूर्व सूचना राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और संबंधित जिलों को अनिवार्य रूप से दी जाए।

मुख्य निर्देश और निर्णय:

🔹 जल छोड़े जाने से पहले अलर्ट:
हर परियोजना को यह स्पष्ट रूप से बताना होगा कि छोड़ा गया पानी कितनी देर में किन क्षेत्रों तक पहुंचेगा और इससे क्या संभावित प्रभाव हो सकते हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन समय पर अलर्ट जारी कर सके।

🔹 रियल टाइम डाटा साझा करना अनिवार्य:
पूर्व चेतावनी प्रणाली से जुड़े सेंसरों द्वारा मापे गए नदी जलस्तर और डिस्चार्ज डाटा को API के माध्यम से रियल टाइम में यूएसडीएमए (उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण) से साझा करने का निर्देश दिया गया।

🔹 आपातकालीन योजना और SOP जल्द तैयार करें:
सभी परियोजनाओं को अपनी आपातकालीन कार्य योजना और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तत्काल तैयार कर यूएसडीएमए को सौंपने और उसे वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के आदेश दिए गए।

🔹 राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल अगस्त-सितंबर में:
अगस्त-सितंबर 2025 के बीच सभी प्रमुख बांध परियोजनाओं के साथ राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का मूल्यांकन हो सके।

🔹 बाढ़ प्रबंधन के लिए समग्र एक्शन प्लान:
सिंचाई विभाग को भारत सरकार और राज्य शासन द्वारा जारी एसओपी को सम्मिलित कर एक समग्र बाढ़ प्रबंधन योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

🔹 नोडल अधिकारियों की तैनाती:
सभी संबंधित विभागों/एजेंसियों को एक-एक नोडल अधिकारी नामित करने के लिए कहा गया है जो आपदा की स्थिति में सूचनाओं का आदान-प्रदान और समन्वय सुनिश्चित करेंगे।


बैठक में ये प्रमुख अधिकारी रहे उपस्थित:

  • श्री आनंद स्वरूप – अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन)

  • डीआईजी राजकुमार नेगी – अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन)

  • संयुक्त सीईओ: मो. ओबैदुल्लाह अंसारी, डॉ. पूजा राणा, डॉ. वेदिका पंत

  • प्रमुख एजेंसियां: सिंचाई विभाग, यूजेवीएनएल, केन्द्रीय जल आयोग, टीएचडीसी, एनटीपीसी जोशीमठ, एनएचपीसी टनकपुर व धौलीगंगा, जीवीके अलकनंदा, जेपी ग्रुप विष्णुप्रयाग, मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून


सचिव सुमन का संदेश:
“हमारी तकनीकी और सूचना प्रणाली समय पर कार्य करे, यह सुनिश्चित करना सबसे अहम है। आपदा से पहले की तैयारियां ही जनहानि को रोक सकती हैं।”

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