देहरादून: भिक्षावृत्ति और बाल मजदूरी के खिलाफ अभियान तेज, अब तक 231 बच्चे रेस्क्यू

जिलाधिकारी सविन बंसल की निगरानी में चल रहा पुनर्वास अभियान, बच्चों को मिल रही शिक्षा और सम्मान

देहरादून, 
देहरादून जिले में भिक्षावृत्ति और बाल मजदूरी के खिलाफ प्रशासन का सख्त रुख सामने आया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशों पर एक डेडीकेटेड रेस्क्यू टीम लगातार पेट्रोलिंग कर भिक्षावृत्ति एवं बाल श्रम में संलिप्त बच्चों को रेस्क्यू कर रही है। यह टीम शहर में सक्रिय रूप से उन बच्चों की पहचान कर रही है जो चौराहों, बाजारों या सार्वजनिक स्थलों पर मजदूरी या भीख मांगते पाए जा रहे हैं।

रेस्क्यू के बाद संवेदनशील पुनर्वास व्यवस्था
रेस्क्यू किए गए बच्चों को साधु राम इंटर कॉलेज स्थित आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर में रखा जा रहा है, जहां उनका शारीरिक, मानसिक और शैक्षिक पुनर्वास सुनिश्चित किया जा रहा है। इस सेंटर में कंप्यूटर, योगा, संगीत, प्रोजेक्टर आधारित शिक्षण और एक्टिविटी-बेस्ड लर्निंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

अब तक 231 से अधिक बच्चों को मिली नई राह
अभियान के तहत अब तक 231 बच्चों को भिक्षावृत्ति और मजदूरी से मुक्त कर मुख्यधारा से जोड़ा गया है। इनमें से 19 बच्चों को नियमित स्कूल में दाखिला दिलाया गया है, जहां वे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़कर नया जीवन शुरू कर रहे हैं।

मानसिक सुधार पर विशेष जोर
सेंटर में मनोवैज्ञानिक, बाल कल्याण विशेषज्ञ और समाजसेवी बच्चों की मानसिक स्थिति को सुधारने और उन्हें आत्मविश्वासी बनाने के लिए सतत परामर्श प्रदान कर रहे हैं। यह प्रयास बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।


जिलाधिकारी सविन बंसल का वक्तव्य:

“हमारा लक्ष्य सिर्फ बच्चों को सड़कों से हटाना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन में आगे बढ़ने का अवसर देना है। यह अभियान सिर्फ एक प्रशासनिक कार्यवाही नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व है।”


विशेषताएं – आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर

  • स्मार्ट क्लास, प्रोजेक्टर आधारित शिक्षा

  • योग, संगीत, खेल की गतिविधियां

  • व्यक्तिगत परामर्श और व्यवहार सुधार

  • भोजन, स्वास्थ्य, और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था

  • बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाने की प्रक्रिया तेज


निष्कर्ष:
देहरादून प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान न सिर्फ बाल अधिकारों की रक्षा कर रहा है, बल्कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग को भविष्य की ओर ले जाने वाला सशक्त प्रयास भी है। यदि यह मॉडल सफल रहा तो यह राज्य और देश के अन्य हिस्सों के लिए अनुकरणीय बन सकता है।

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