देहरादून ,
उत्तराखंड में युवाओं से रोजगार के नाम पर धोखाधड़ी करने वाली बिहार की एनजीओ सिडको (लघु उद्योग विकास परिषद) की पोल खुल गई है। मामले का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संज्ञान लेते हुए एसएसपी देहरादून को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस ने संस्था के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए इसके सभी बैंक खातों को फ्रीज़ कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
🔍 क्या है मामला?
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बिहार के पटना में पंजीकृत सिडको संस्था ने देहरादून के अजबपुर क्षेत्र में ऑफिस खोलकर युवाओं से रोजगार, प्रशिक्षण व सदस्यता के नाम पर ₹6100 प्रति व्यक्ति वसूले।
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संस्था का दावा था कि यह शुल्क सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार और प्रशिक्षण खर्चों के तहत लिया जा रहा है।
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लेकिन जांच में संस्था की कार्यप्रणाली और बैंक खातों में गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं।
🚔 पुलिस ने क्या किया?
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थाना नेहरू कॉलोनी में संस्था के खिलाफ मु०अ०सं०- 231/25, धारा 318(4)/61(2) BNS के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
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पुलिस ने संस्था के ऑफिस से सभी दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए।
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संस्था और उसके अकाउंटेंट के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया।
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जिन खातों में संस्थान ने ज्यादा ट्रांजैक्शन किए, उन्हें भी ट्रैक कर फ्रीज़ करने की कार्रवाई की जा रही है।
👥 संदिग्ध नेटवर्क और MLM जैसी योजना:
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संस्था तीन बिहार निवासियों के नाम पर पंजीकृत है।
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खुलासा हुआ है कि हर नए सदस्य को जोड़ने पर पुराने सदस्य को ₹400 का भुगतान किया जा रहा था।
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जबकि संस्था के नियमों में रोजगार या प्रशिक्षण के एवज में किसी भुगतान का कोई जिक्र नहीं है।
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यह मॉडल MLM (मल्टी लेवल मार्केटिंग) जैसी संदिग्ध प्रणाली की ओर इशारा करता है।
⚠️ मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
“युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।”
मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:
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मामले की विवेचना पूरी पारदर्शिता से की जाए।
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ठगी का शिकार बने युवाओं को न्याय दिलाया जाए।
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ऐसी फर्जी संस्थाओं पर निगरानी और सतर्कता बढ़ाई जाए।
सिडको एनजीओ द्वारा की गई यह ठगी सिर्फ देहरादून ही नहीं, बल्कि प्रदेशभर के बेरोजगार युवाओं के साथ विश्वासघात है। यह मामला एक बड़ा उदाहरण है कि कैसे रोजगार और प्रशिक्षण के नाम पर अवैध नेटवर्क युवाओं को गुमराह कर रहा है। पुलिस की शुरुआती कार्रवाई ने राहत तो दी है, लेकिन गिरोह के जाल की परतें अभी खुलनी बाकी हैं।