देहरादून ,
उत्तराखण्ड की भाषायी विरासत को संरक्षित और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में उत्तराखण्ड भाषा संस्थान की साधारण सभा एवं प्रबन्ध कार्यकारिणी समिति की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने कई महत्त्वपूर्ण घोषणाएं और निर्देश दिए जिनका उद्देश्य प्रदेश की लोकभाषाओं, साहित्य और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण एवं संवर्द्धन है।
🗺 उत्तराखण्ड की बोलियों का बनेगा भाषाई मानचित्र
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि उत्तराखण्ड की विविध बोलियों का एक विस्तृत भाषाई मानचित्र तैयार किया जाए। इस मानचित्र में क्षेत्रीय भाषाओं, उपभाषाओं और बोलियों का भौगोलिक वर्गीकरण किया जाएगा, जिससे भाषा संरक्षण की योजनाओं को नई दिशा मिल सके।
📚 डिजिटलीकरण और ई-लाइब्रेरी की पहल
मुख्यमंत्री ने बोलियों, लोककथाओं, लोकगीतों एवं पारंपरिक साहित्य के डिजिटलीकरण पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए एक ई-लाइब्रेरी बनाई जाए। साथ ही, लोककथाओं पर आधारित ऑडियो-विजुअल सामग्री तैयार की जाए ताकि नई पीढ़ी इनसे सहज रूप से जुड़ सके।
🏫 स्कूलों में स्थानीय भाषाओं का समावेश
राज्य के सभी स्कूलों में सप्ताह में एक दिन स्थानीय भाषा में भाषण, निबंध एवं अन्य प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जिससे बच्चों में अपनी मातृभाषा के प्रति अभिरुचि बढ़े।
🎭 साहित्य महोत्सव और पुरस्कार
-
उत्तराखण्ड भाषा एवं साहित्य पर आधारित राज्य स्तरीय साहित्य महोत्सव का आयोजन होगा जिसमें देशभर से प्रख्यात साहित्यकारों को आमंत्रित किया जाएगा।
-
उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान की राशि बढ़ाकर ₹5.51 लाख कर दी गई है।
-
दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान ₹5 लाख की राशि के साथ प्रदान किया जाएगा।
-
युवा कलमकार प्रतियोगिता के माध्यम से 18-24 और 25-35 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।
📖 सचल पुस्तकालय और बड़े प्रकाशकों से सहयोग
राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों तक सचल पुस्तकालयों की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए प्रमुख प्रकाशकों से सहयोग लिया जाएगा ताकि गुणवत्तापूर्ण साहित्य ग्रामीण पाठकों तक पहुंचे।
🎥 बच्चों के लिए स्थानीय भाषाओं में शैक्षिक वीडियो
उत्तराखण्ड भाषा संस्थान स्थानीय बोलियों को बढ़ावा देने हेतु छोटे-छोटे शैक्षिक वीडियो तैयार करेगा जो बच्चों को रोचक तरीके से अपनी भाषा से जोड़ेंगे।
🎶 ‘बाकणा’ गायन का अभिलेखीकरण
जौनसार-बावर क्षेत्र की पौराणिक गायन परंपरा ‘बाकणा’ का दस्तावेजीकरण कर इसे संरक्षित किया जाएगा। यह परंपरा पांडवों से जुड़ी प्राचीन गाथाओं को संगीतमय रूप में प्रस्तुत करती है।
📚 साहित्यिक संग्रह और शोध
-
गोविन्द बल्लभ पंत के समग्र साहित्य का संकलन किया जाएगा।
-
50-100 वर्ष पूर्व के उत्तराखण्डी साहित्यकारों के देशभर की पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखों का संग्रह किया जाएगा।
-
उच्च हिमालयी एवं जनजातीय भाषाओं पर शोध परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।
🏞 बनेंगे दो साहित्य ग्राम
राज्य में प्राकृतिक परिवेश के बीच दो साहित्य ग्राम विकसित किए जाएंगे जहां साहित्यकारों के बीच सृजनात्मक चर्चाएं, गोष्ठियां और लेखन शिविर आयोजित होंगे।