देहरादून ,
उत्तराखंड भर में विपक्षी दलों एवं विभिन्न जन संगठनों के प्रतिनिधियों जगह जगह में एकत्रित होकर महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय में इकटठा हुए और वहां पर सत्ताधारी दल के नेताओं के द्वारा महिलाओं पर अत्याचार करने वाले अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है जिसके खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया और सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्युश सिंह के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रेषित किया गया। इस अवसर पर ज्ञापन में कहा गया कि समुदाय विशेष को दोषी ठहरा कर चमोली और अन्य जगहों में नफरती हिंसा द्वारा जनता का ध्यान अपना नाकामी से हटाना चाह रही है। ज्ञापन में कहा गया कि बेहद शर्मनाक बात है कि राज्य में लगातार महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं सामने आ रही है और ऐसे दो घटनाओं में सत्ताधारी दल के नेता भी आरोपित हैं। ज्ञापन में कहा गया कि पीड़ित लोगों की और से आरोप यह भी हैं कि प्रशासन उनको संरक्षण दे रहा है, लेकिन इस मुद्दे पर कार्यवाही करने के बजाय सत्ताधारी दल के नेता और उनके करीब संगठन लगातार हिंसा और नफरती अपराधों को बढ़ावा दे रहे हैं। ज्ञापन में प्रदर्शनकारियों ने मांग को उठाया कि महिलाओं पर हो रहे अपराध एवं नफरती अपराध, दोनों पर सख्त कार्यवाही कराने के लिए वन स्टॉप सेंटर, उच्चतम न्यायलय के 2018 के फैसले और अन्य जरूरी प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सरकार स्थापित करे। ज्ञापन में कहा गया कि उल्टा अभी उनको खत्म किया जा रहा है। ज्ञापन में कहा गया कि नए भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों खास तौर पर धारा 197(1)(ख) पर भी कोई अमल नहीं हो रहा है, जबकि सत्ताधारी दल नए आपराधिक संहिताओं पर गर्व रखने की बात कहती है। राजधानी सहित प्रदेश भर में आंदोलन किये गये और ज्ञापन दिये गये।