देहरादून ,
उत्तराखंड के पंजीकृत गौसदनों के संचालकों ने शहरी विकास विभाग एवं पशु कल्याण बोर्ड द्वारा गौमाता के खिलाफ दुव्र्यवहार करने पर धरना प्रदर्शन किया और जोरदार नारेबाजी के बीच सभी गौशाला संचालक धरने पर बैठ गये हैं। इस दौरान संचालकों का आरोप है कि उत्तराखंड जो गौ सेवा की बड़ी-बड़ी बातें करता है, और अब गौमाता के चारे के पैसे का गबन करने लगा है। इस अवसर पर गौशाला संचालकों का आरोप है कि शहरी विकास विभाग व उत्तराखंड पशु कल्याण बोर्ड द्वारा गौमाता की अनदेखी की जा रही है और उनके चारे व भोजन के लिए निर्धारित 40 करोड़ से अधिक की धनराशि को विभाग ने गबन कर लिया है। इस अवसर पर गौशाला संचालकों का कहना है कि जब से विभाग ने प्रति गोवंश भरण पोषण के लिए 80 रुपये की धनराशि निर्धारित की है, तब से विभाग गौसदन संचालकों के साथ दुर्व्यवहार और धमकियों पर उतर आया है। इस दौरान संचालकों को आवाज उठाने पर झूठे जांचों में फंसाने की धमकियां भी दी जा रही हैं। पिछले छह महीने से अनुदान की राशि जारी करने में भी लगातार देरी की जा रही है। इस अवसर पर गौशाला संचालकों ने अपनी मांगों के समर्थन में धरने पर बैठने का निर्णय लिया है और यह स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक वह अपने संघर्ष को जारी रखेंगे। इस अवसर पर गौशाला संचालकों ने कहा है कि यह धरना प्रदर्शन उत्तराखंड में गौमाता और गौसदनों की दुर्दशा को उजागर करता है और पशु कल्याण बोर्ड से तत्काल कार्रवाई की मांग करता है और जल्द ही कार्यवाही न किये जाने पर आंदोलन को और तेज किया जायेगा।