पद्मश्री वैद्य बालेंदु प्रकाश का निधन, आयुर्वेद जगत में शोक की लहर

देहरादून ,

प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य और पद्मश्री सम्मानित वैद्य बालेंदु प्रकाश का निधन हो गया। उनके निधन की खबर से आयुर्वेद जगत और उनसे जुड़े लोगों में शोक की लहर है। उन्हें आयुर्वेद, विशेष रूप से रसशास्त्र और शोध आधारित चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए जाना जाता था।

वर्ष 1999 में पद्मश्री से सम्मानित वैद्य बालेंदु प्रकाश ने आयुर्वेद को आधुनिक वैज्ञानिक शोध और प्रमाण आधारित चिकित्सा से जोड़ने की दिशा में लंबे समय तक कार्य किया। उन्होंने चार दशक से अधिक समय तक रसशास्त्र के क्षेत्र में शोध किया और विभिन्न जटिल एवं दीर्घकालिक रोगों के उपचार की दिशा में काम किया।

वैद्य बालेंदु प्रकाश की पहचान विशेष रूप से कैंसर और क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस से जुड़े आयुर्वेद आधारित शोध और उपचार पद्धतियों के विकास के लिए रही। वर्ष 2024 में प्रकाशित एक शोध पत्र में उन्होंने अपनी टीम के साथ वंशानुगत पैंक्रियाटाइटिस से जुड़े आयुर्वेदिक उपचार प्रोटोकॉल पर अध्ययन किया था।

उन्होंने पारंपरिक रसशास्त्र और भस्म चिकित्सा को वैज्ञानिक कसौटियों पर परखने और मानकीकृत करने पर भी विशेष जोर दिया। उनके शोध कार्यों में आयुर्वेदिक औषधियों और उपचार पद्धतियों के वैज्ञानिक मूल्यांकन का प्रयास प्रमुखता से दिखाई देता है। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान से जुड़े एक प्रकाशन में भी पैंक्रियाटाइटिस और अग्न्याशय के कैंसर की रोकथाम से संबंधित उनके शोध का उल्लेख मिलता है।

पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन के रहे मानद चिकित्सक

वैद्य बालेंदु प्रकाश का देश के पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन से भी विशेष जुड़ाव रहा। वह उनके मानद चिकित्सक रहे और राष्ट्रपति के संरक्षण में आयुर्वेदिक अनुसंधान से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया।

देहरादून में उन्होंने अपने पिता वैद्य चंद्र प्रकाश की स्मृति में स्थापित कैंसर रिसर्च फाउंडेशन के माध्यम से आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध कार्यों को आगे बढ़ाया। उनका उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैज्ञानिक शोध और प्रमाणों के आधार पर मजबूत करना रहा।

उनके निधन पर कांग्रेस नेता सुरेंद्र कुमार ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वैद्य बालेंदु प्रकाश का निधन आयुर्वेद के क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा कि चिकित्सक, शोधकर्ता और आयुर्वेद को वैज्ञानिक आधार पर स्थापित करने के पक्षधर के रूप में वैद्य बालेंदु प्रकाश की कार्यशैली आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।

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