देहरादून,
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से उच्च शिक्षा को रोजगार, उद्यमिता और नवाचार से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। राज्य सरकार की नीतियों और योजनाओं के परिणामस्वरूप आज प्रदेश के युवाओं को न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है, बल्कि वे स्वरोजगार और स्टार्टअप्स के माध्यम से अपने सपनों को भी साकार कर रहे हैं।
🎓 उच्च शिक्षा में व्यापक विस्तार
राज्य स्थापना के समय उत्तराखंड में केवल 3 राज्य विश्वविद्यालय और 31 शासकीय महाविद्यालय थे।
वर्तमान में यह संख्या बढ़कर —
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11 राजकीय विश्वविद्यालय (जिनमें 5 राज्य विश्वविद्यालय शामिल)
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118 सरकारी महाविद्यालय
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31 निजी विश्वविद्यालय
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238 निजी महाविद्यालय
तक पहुँच गई है।
इस विस्तार से राज्य में उच्च शिक्षा के अवसरों में गुणात्मक और मात्रात्मक वृद्धि हुई है।
📈 छात्रसंख्या में पाँच गुना वृद्धि
राज्य गठन के समय उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या 1 लाख थी, जो अब बढ़कर 5 लाख हो गई है।
सिर्फ सरकारी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ही 2.54 लाख छात्र अध्ययनरत हैं, जिनमें से 1.53 लाख छात्राएँ हैं — यानी कुल छात्रसंख्या का 60% से अधिक हिस्सा। यह दर्शाता है कि बालिकाएँ भी उच्च शिक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
👩🏫 स्टाफ की कमी दूर — शिक्षकों की संख्या दोगुनी से अधिक
वर्ष 2000 में सरकारी कॉलेजों में
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918 शिक्षक और
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795 शिक्षणेत्तर कर्मचारी थे।
वर्तमान में यह संख्या बढ़कर
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2351 शिक्षक और
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1036 शिक्षणेत्तर कर्मचारी हो गई है।
पिछले पाँच वर्षों में सरकार ने 1059 शिक्षकों और 290 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भर्ती की है।
🏅 गुणवत्ता और रैंकिंग पर विशेष ध्यान
राज्य सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों को NAAC प्रत्यायन और NIRF रैंकिंग पर फोकस करने के निर्देश दिए हैं।
अब तक —
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3 राज्य विश्वविद्यालय,
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6 निजी विश्वविद्यालय,
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2 डीम्ड विश्वविद्यालय,
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45 सरकारी कॉलेज,
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11 अनुदानित कॉलेज और
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6 निजी कॉलेज
NAAC द्वारा प्रत्यायनित हो चुके हैं।
🧑💼 शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण और नवाचार की पहल
संकाय गुणवत्ता सुधार हेतु शिक्षकों को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रशिक्षण दिया गया है —
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IISc व IISER से 93 शिक्षक प्रशिक्षित
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EDII अहमदाबाद से 185 शिक्षकों को उद्यमिता प्रशिक्षण
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IIM काशीपुर से 76 प्राचार्य व शिक्षकों को नेतृत्व प्रशिक्षण
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इन्फोसिस स्प्रिंगबोर्ड से 64 शिक्षक प्रशिक्षित
🚀 देवभूमि उद्यमिता योजना से बढ़ावा
राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में देवभूमि उद्यमिता योजना के माध्यम से स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
अब तक छात्रों द्वारा 1000 छात्र उद्यम एवं स्टार्टअप शुरू किए गए हैं, जिनमें से 333 छात्र स्वयं का उद्यम संचालित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुके हैं।
उत्तराखंड सरकार की यह पहल सुनिश्चित कर रही है कि राज्य के युवा अब उच्च शिक्षा, डिजिटल गवर्नेंस और रोजगार अवसरों से वंचित न रहें, बल्कि नवाचार के मार्गदर्शक बनें।
