धामी सरकार की नई सोच: अब आपदा प्रबंधन में मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा को भी प्राथमिकता

 देहरादून ,


🔹 आपदा प्रभावितों के मनोबल को सशक्त बनाने की पहल

लगातार प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे उत्तराखंड में अब सरकार ने आपदा प्रबंधन के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान केंद्रित किया है।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार के नेतृत्व में राज्य स्वास्थ्य विभाग ने आपदाओं के दौरान मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर नई पहल शुरू की है।


🔹 निमहांस-बेंगलुरू के सहयोग से विशेष प्रशिक्षण

  • यह कार्यक्रम राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और निमहांस (NIMHANS), बेंगलुरू के संयुक्त सहयोग से चलाया जा रहा है।

  • उद्देश्य है — आपदा के दौरान और बाद में प्रभावित लोगों को मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक सहायता सेवाएं प्रदान करना।

  • प्रशिक्षण की शुरुआत चंदर नगर स्थित स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र, देहरादून में हुई।


🔹 तीन चरणों में होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम

चरण जिला विवरण
प्रथम बैच देहरादून प्रारंभिक प्रशिक्षण
द्वितीय बैच पौड़ी गढ़वाल मध्य चरण
तृतीय बैच नैनीताल अंतिम चरण
  • आगामी दो महीनों में लगभग 100 स्वास्थ्यकर्मी प्रशिक्षित किए जाएंगे।

  • इनमें मनोचिकित्सक, चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, काउंसलर और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।

  • ये कर्मी बाद में जिला एवं ब्लॉक स्तर पर जाकर आपदा प्रभावित परिवारों को मानसिक सहायता प्रदान करेंगे।


🔹 डॉ. आर. राजेश कुमार का वक्तव्य

“आपदाओं में सिर्फ घर और जीवन नहीं टूटते, बल्कि मन भी टूटते हैं।
हमारा लक्ष्य यह है कि उत्तराखंड के हर जिले में ऐसे प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी हों जो लोगों की भावनात्मक पीड़ा को समझकर उन्हें मानसिक रूप से सशक्त बना सकें।
निमहांस के सहयोग से यह पहल राज्य के स्वास्थ्य तंत्र को नई संवेदनशीलता और मजबूती देगी।”


🔹 मानसिक स्वास्थ्य को आपदा राहत का हिस्सा

  • अब आपदा राहत का अर्थ केवल भौतिक पुनर्वास नहीं रहेगा, बल्कि इसमें “मन की शांति और मानसिक सुरक्षा” भी शामिल होगी।

  • यह पहल उत्तराखंड को मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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