देहरादून ,
(हरबख्श सिंह)
गुरुद्वारा साहिब श्री पांवटा साहिब में संत कालपी ऋषि की यादगार बनी हुई है जिस का इतिहास अनुसार दशमेश पिता साहिब श्री गुरू गोबिंद सिंह जी संत कालपी ऋषि को कालसी से सोने की पालकी में बिठा कर पांवटा साहिब ले कर आए थे। कालपी ऋषि उस समय बहुत वृद्ध अवस्था में गुरु जी के दर्शन की अभिलाषा में थे। सतगुर श्री गुरू गोबिंद सिंह जी खुद कालसी पहुंचे थे और संत जी को दर्शन दिए।
यह तप अस्थान पुरानी कालसी नगरी में स्थित है और संगत ने उस स्थान को उजागर किया गया और संत जी के पुराने तप स्थान ठाकर द्वारा में गुरमत समागम करने आरंभ कर दिए हैं। संत कालपी ऋषि ट्रस्ट बना कर उस स्थान पर निशान साहिब स्थापित कर दिया है। हर अमावस को ही गुरमात समागम और गुरु के लंगर आरंभ हो गए है। इस ट्रस्ट दे चेयरमैन भाई रणजोत सिंह निहालगढ़ पांवटा साहिब सर्वसंप्ति से चुने गए हैं।
समूह गुरु नानक नाम लेवा संगत को आग्रह है कि इस पवित्र गुरु गोबिंद सिंह जी को चरणशोह प्रपात अस्थान के दर्शन करने हर अमावस को पहुंच कर अपने जीवन सफल बनाएं।